युवाओं में पनप रहे अलगाववाद की भावना पर कहा कि कोई भी ताकत दो भाईयों के बीच खाई पैदा नहीं कर सकती है। जम्मू-कश्मीर तथा देश के अन्य भागों के साथ खाई बनाने की कोशिश करने वाले अब विलुप्त होने के कगार पर हैं।
कश्मीरियत पर कहा कि उन्होंने पिछले साल गुरेज में जवानों के साथ दिवाली मनाई थी और अब पवित्र रमजान में आपके बीच हैं। लाल किला से स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए अपने भाषण को दोहराते हुए कहा कि ना गाली से समस्या सुलझने वाली है, ना गोली से, समस्या सुलझेगी हर कश्मीरी को गले लगाने से।
प्रधानमंत्री ने स्थायी स्थिरता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर कहा कि इसके लिए केंद्रीय वार्ताकार की नियुक्ति की गई है जिसके पास कोई भी अपने विचार रख सकता है। सरकार की ओर से हिंसा के दुष्चक्र को समाप्त करने के लिए कोई भी रोड़ा नहीं अटकाया जा रहा है।
लेकिन कश्मीरियत तथा लोकतंत्र के बीच गठबंधन रियासत की जनता पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता, युवा, बौद्धिक, धर्म गुरुओं को जम्मू-कश्मीर के विकास में अपना हिस्सा देना जरूरी है। आखिर में मोदी ने यह भी कहा कि हर समस्या, हर टकराव का केवल एक समाधान है और वह है विकास।
भाषण का अंत उन्होंने कश्मीरी भाषा से की और कहा कि भगवान उन्हें सलामत रखे। इस दौरान राज्यपाल एनएन वोहरा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, आरके सिंह, डा. जितेंद्र सिंह, उप मुख्यमंत्री कवींद्र गुप्ता व बिजली मंत्री सुनील शर्मा, सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद रहे।