भाजपा और पीडीपी की भावी सरकार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती का संयुक्त विजन न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का आधार बन रहा है। इसमें आतंकवाद पर सख्ती की बात होगी लेकिन पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम के लिए योजनाएं बनाने का वादा भी होगा।
रियासत के तीनों खित्तों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का संतुलित विकास सीएमपी का मूल मंत्र बना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत के मंत्र से कश्मीर समस्या के समाधान पर भाजपा और पीडीपी सहमत हैं। पीडीपी ने भी वाजपेयी की नीतियों को आगे बढ़ाने की बात कही है। पर्यटन विकास और रोजगार के समयबद्ध योजनाओं के वादे को भी सीएमपी में शामिल किया जा रहा है।
पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद इन दिनों छुट्टियां बिताने मुबंई में हैं। सूत्रों की मानें तो मुफ्ती की भाजपा नेताओं से मुबंई में बातचीत हुई है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के बाद टेबुल पर आधिकारिक बातचीत से पहले मुफ्ती अनौपचारिक बातचीत में स्वयं भी शामिल हुए।
सीएम और मंत्रियों पर आरोपों की जांच के लिए आयोग
इससे पहले पीडीपी की ओर से डा. हसीब द्राबू भाजपा के महासचिव राम माधव से बातचीत कर रहे थे। दोनों दलों की कोशिश है कि इस माह के मध्य तक रियासत में सरकार का गठन कर लिया जाए। पीडीपी को कश्मीर में और भाजपा को जम्मू संभाग में बहुमत मिला है।
लिहाजा सीएमपी में इन दलों के वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए कई बिन्दु सीएमपी में शुमार किए गए हैं। कश्मीरी वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए आतंकवाद के मामले में फंसे निर्दोष लोगों के मामलों की फिर से समीक्षा का मुद्दा सीएमपी में शामिल किया गया है। जम्मू की उपेक्षा को समाप्त करने के लिए समान रूप से फंडिंग की व्यवस्था का जिक्र सीएमपी में होगा।
भ्र्ष्टाचार पर अंकुश के लिए मंत्रियों और सीएम को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। शिकायतों की जांच के लिए आयोग के गठन का वादा सीएमपी में किया जा सकता है। मुठभेड़ में निर्दोष कश्मीरी युवकों की मौत के मामलों की जांच का वादा सीएमपी में शामिल किया जा रहा है।
मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्तर पर कश्मीरियों के जख्म भरने के लिए कार्यक्रमों को सीएमपी में जगह दी गई है। सबको न्याय दिलाने का वादा इसका आधार बनेगा।
कश्मीरी पंडितों की वापसी को सीएमपी में प्रमुख स्थान
मानवाधिकार की रक्षा का वादा भी किया जा रहा है। आतंकवाद पीड़ितों के लिए मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था होगी। साथ ही बार्डर पर पाकिस्तान की गोलियों के शिकार हुए लोगों के परिवारों के मुआवजे की राशि भी बड़ाकर पांच लाख तक करने का वादा होगा।
बार्डर के युवकों के लिए विशेष भर्ती अभियान और गोलाबारी से पीड़ितों के लिए पास के सुरक्षित इलाकों में प्लाट देने का वादा भी सीएमपी में शामिल होने वाला है। सूत्रों की मानें तो कश्मीरी पंडितों की वापसी को सीएमपी में प्रमुख रूप से स्थान दिया जा रहा है।
इसके लिए पैकेज की व्यवस्था का जिक्र इसमें शामिल है। पुलिस प्रशासन में सुधार की बात भी सीएमपी में शुमार है। जम्मू और श्रीनगर को स्मार्ट सिटी बनाने, तीनों खित्तों में पर्यटन विकास, बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए नए प्रोजेक्ट, रोजगार के नए अवसर, पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा गुज्जरों और अन्य फिछड़ी जातियों के विकास के लिए संतुलित योजनाएं भी सीएमपी का आधार बन रही हैं।