हाईकोर्ट में कुल 3,65,687 लंबित मामलों में से 2,40,872 आपराधिक, जबकि 1,24,815 केस सिविल के हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के आंकड़े यह तस्वीर दिखाते हैं। देरी की वजहों पर जाएं तो श्रीनगर में अभियुक्त फरार होने की वजह से 3,096 मामले लंबित हैं।
तारीख-पे-तारीख...। ये एक फिल्म का मशहूर डायलॉग है, लेकिन अदालतों पर मुकदमों के बोझ की सच्चाई भी। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में इस वक्त 3.65 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें देरी की सबसे बड़ी वजह स्टे है। प्रदेश के आठ जिलों में आरोपियों के फरारी और गवाही इंसाफ का इंतजार बढ़ा रहे हैं। इनमें चार जम्मू और चार कश्मीर के जिले शामिल हैं।
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हाईकोर्ट में कुल 3,65,687 लंबित मामलों में से 2,40,872 आपराधिक, जबकि 1,24,815 केस सिविल के हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के आंकड़े यह तस्वीर दिखाते हैं। देरी की वजहों पर जाएं तो श्रीनगर में अभियुक्त फरार होने की वजह से 3,096 मामले लंबित हैं, वहीं सांबा में अभियुक्तों के फरार होने की वजह से 18 मामले अटके हैं। बडगाम में 1,080 मुकदमों में गवाहों की वजह से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही।
शोपियां में 322, जबकि गांदरबल में 282 में गवाह मुकदमों में कार्रवाई में देरी का सबब बने हैं। रामबन में ऐसे 53 और किश्तवाड़ में 43 ऐसे मामले हैं। इसके लिए गवाह के पेश न होने, गवाही पूरी न हो पाने, गवाहों की जांच में देरी जैसे कारण जिम्मेदार हैं। डोडा में 88 मुकदमों में कार्रवाई रिकॉर्ड अनुपलब्ध होने की वजह से नहीं बढ़ पा रही है।
दूर-दराज के इलाके भी बनते हैं मुश्किल
गवाह के मामले में दूर-दराज के इलाके भी मुश्किल पैदा करते हैं। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी एडवोकेट गगनदीप सिंह लकी के अनुसार कई बार कोर्ट की ओर से नोटिस निकाला जाता है, लेकिन पता आधा-अधूरा होने की वजह से गवाह ट्रैप नहीं हो पाता। पुलिस भी कई इलाकों में जाने से बचती है। लिखवा लिया जाता है कि गवाह नहीं मिला। इस तरह के कई कारण होते हैं।