एलओसी माइन ब्लास्ट पीड़ितों को मुआवजा देने से संबंधित दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने स्टेटस रिपोर्ट पेश न होने को गंभीरता से लिया है।
खंडपीठ ने पुंछ के डीसी को आदेश दिया कि दो सप्ताह के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करें या फिर अगली सुनवाई पर खुद उपस्थित हों। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पाया कि पुंछ और आसपास के क्षेत्रों में ब्लास्ट का शिकार होने वालों के संबंध में केंद्र सरकार ने बताया कि 10 दिसंबर 2001 तक कुल 90 लोग प्रभावित हुए और इनमें से 44 को मुआवजा दे दिया गया।
शेष 46 मामलों में से 28 पुंछ के डीसी को वापस भेज दिए गए, ताकि उनसे मामलों की विस्तृत जानकारी हासिल की जा सके। अन्य 16 मामलों में सेना के पास कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। ऐसे लोगों की जानकारी के लिए सिविल अथारिटी से संपर्क किया गया है।
सिविल अथारिटी की ओर से भेजे गए ऐसे केसों में पूरी जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई। डीसी को इस संबंध में आग्रह किया गया है, ताकि मुआवजे की राशि प्रदान की जा सके। खंडपीठ ने पाया कि समय देने के बावजूद डीसी पुंछ ने निर्देशों के अनुसार ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं की। सिर्फ एक प्रमाण पेश किया गया कि डीसी पुंछ ने नौ केसों को एक्सग्रेसिया के लिए पेश की है।
खंडपीठ ने केंद्र सरकार को भी कहा कि डीसी द्वारा पेश नौ लोगों की जानकारी के मामले में क्या कार्यवाही की। अदालत ने कहा कि डीसी पुंछ ने देरी के लिए चुनावी प्रक्रिया को कारण बताया है, लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में डीसी का तर्क स्वीकार नहीं है।