हवाई कंपनियों द्वारा यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने के संबंध में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज (जम्मू) के पूर्व प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा और एडवोकेट बलदेव सिंह ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हवाई टिकट का मामला उठाया। याचिका में कहा गया कि अलग-अलग एयरलाइंस कंपनियों की ओर से अपनी सुविधा के अनुसार किराया वसूला जाता है।
इन कंपनियों पर नजर रखने के लिए न तो कोई अथारिटी है और न ही कोई पारदर्शिता है। इतना ही नहीं, विमानों की लेटलतीफी और तकनीक खामियां आम बात है। इससे यात्री कई बार कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने से वंचित रह जाते हैं।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि हवाई कंपनियों से पूछा जाए कि किस आधार पर न्यूनतम और अधिकतम किराया तय किया जाता है। साथ ही इस मामले में पारदर्शिता बरतने के आदेश दिए जाएं। साथ ही अलग-अलग कंपनियों के किराया में नियंत्रण रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश बंसी लाल भट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। केंद्र सरकार के एएसजीआई सिंधु शर्मा ने जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। जिस पर खंडपीठ ने अनुमति दी।