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यहां शाम ढलते ही गांव छोड़ देते हैं लोग

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सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों दहशत में बसर कर रहे हैं। शाम ढलते ही सभी सुरक्षित ठिकानों पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भेजने देते हैं। अखनूर क्षेत्र में मंगलवार को सीमा पार की गोलाबारी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
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घरानी, घराना, सुचतेगढ़, अब्दुल्लिया, चंदू चक्क, शामका, कोराटाना खुर्द आदि गांव के लोग फायरिंग के कारण परेशान हैं। लोग दिन के समय घरों से बाहर नहीं निकलते।

सुचेतगढ़ के बुजुर्ग हवेली राम का कहना है कि लोग घरों में कैद रहने के लिए मजबूर हैं। जानवरों को भी बाहर नहीं छोड़ सकते। घर में सूखा चारा खिलाना पड़ रहा है।
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"यहां सब भगवान भरोसे है"

खेतों में सुरक्षा के लिहाज से जाने नहीं दिया जा रहा। सरपंच सवर्ण लाल भगत का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग किससे अपना दर्द बांटें। सब भगवान भरोसे चल रहा है। कब क्या हो जाए, कोई भी नहीं जानता।

अब पाकिस्तान क्षेत्र में पाक रेंजर्स भी नहीं दिखाई देते। अगर दिखाई देते हैं तो अपनी पोस्टों में बने टावर के ऊपर होते हैं। योगेंद्र सिंह, तरसेम लाल, सुखवंत सिंह, शाम लाल का कहना है कि मंगलवार को अखनूर क्षेत्र में सेना का एक जवान शहीद हो गया, जबकि दो घायल हो गए।

ऐसे वक्त में शाम ढलते ही बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना ही बेहतर है। कब उस पार से गोलाबारी शुरू हो जाए, कौन जानता है।
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सुरक्षित स्थानों पर प्लाट मुहैया कराने की मांग

कांग्रेस नेता मोहन सिंह चौधरी ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता कर सरकार से सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों की दिक्क्तों को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर प्लाट मुहैया करवाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि आए दिन सीमा के पास रहने वालों को पाक फायरिंग का सामना करना पड़ रहा है। किसी गांव में मवेशी मारे जा रहे हैं, तो कहीं लोगों के घरों की दीवार और छत गोलाबारी से क्षतिग्रस्त हो रही है।

सरकार द्वारा सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए भूमि मुहैया नहीं करवाई जाती, तब तक सीमांत ग्रामीण दिक्कतों का सामना करने को मजबूर हैं।
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