जागरूकता के अभाव और अंधविश्वास के चलते झाड़ फूंक के चक्कर में मानसिक रोगियों की हालत बिगड़ रही है। संभाग के ग्रामीण इलाके ज्यादा प्रभावित हैं। मनोचिकित्सा अस्पताल जम्मू में ऐसे बड़ी संख्या में मामले पहुंच रहे हैं, जो इन चक्करों में फंसकर बुरी तरह से बीमार हो चुके हैं। इनमें मिरगी के मरीजों की कई बार जान चली जाती है।
जिला स्तर पर स्थायी मनोचिकित्सक न होने के कारण लोग जम्मू तक पहुंचने में देरी कर देते हैं, जिससे पीड़ित को पहले झाड़ फूंक का सहारा लेकर ठीक करने की कोशिश की जाती है। लेकिन मानसिक रोगियों पर ऐसी चिकित्सा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। उल्टा उनकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है।
मनोचिकित्सा अस्पताल जम्मू में कार्यरत मनोचिकित्सक डॉ मनु अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ समय से मानसिक रोगियों के मामले में देखा गया है कि संभाग में तांत्रिकों के सहारे बड़ी संख्या में लोग मानसिक रोगों के पीड़ितों का इलाज करवा रहे हैं। राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, कठुआ सहित अन्य पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
मसलन स्कीजोफ्रेनिया के पीड़ित व्यक्ति का व्यवहार, सोच, सेंस आर्गन और भावना का आपस में तालमेल कम हो जाता है। रोगी अपने भीतर दो या तीन लोगों के अनुभवों या चेहरों को देखने लगता है। इन मामलों में अधिकांश लोग भूतप्रेत का चक्कर समझ लेते हैं। लेकिन ऐसे पीड़ित को देरी से इलाज मिलने के कारण उनकी हालत काफी बिगड़ जाती है। जिला स्तर मेें इलाज के लिए ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं।
जिला अस्पतालों से मेडिकल आफिसरों को मनोचिकित्सा अस्पताल जम्मू में तीन माह का बेसिक कोर्स करवाया जा रहा है। इसमें चार चरणों में चार-चार मेडिकल आफिसर को लिया गया है। ये जिला स्तर पर जाकर मानसिक रोगियों को प्राथमिक चिकित्सा देने का काम करेंगे।
मनोचिकित्सा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. कीर्ति बी शर्मा का कहना है कि बेसिक कोर्स से जिला स्तर पर मानसिक रोगियों को वहीं पर प्राइमरी स्तर का उचित इलाज मिल सकेगा। गंभीर मरीजों को ही जम्मू में रेफर किया जाएगा।