पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कहा कि वह राज्य में नई चुनौतियों का सामना मिलकर करने के लिए तैयार रहेगी। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद पीडीपी की राजनीतिक मामलों की समिति की मंगलवार को हुई बैठक के बाद पीडीपी प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा कि पार्टी ने जम्मू कश्मीर में मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बारे में व्यापक चर्चा की।
इसमें पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक में निर्णय किया गया कि राज्य को टुकड़ों में बांटने और लोगों को कमजोर बनाने के नापाक इरादों को विफ ल करने के लिए व्यापक आम सहमति बनाए जाने की आवश्यकता है।
बैठक में यह भी फैसला किया गया कि राज्य का विशेष दर्जा बहुआयामी है। इसमें किसी प्रकार का छेड़छाड़ राज्य के नागरिकों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने का होगा। यह महसूस किया गया कि मतदाता किसी सामान्य मुद्दे पर कुछ इलाके में एकजुट रहे जबकि राज्य के अन्य हिस्से में विभाजन की कोशिश की गई ताकि क्षेत्रीय लोगों की भावनाओं को नुकसान पहुंचाया जा सके।
इसलिए राजनीतिक पहल करनी होगी ताकि जम्मू-कश्मीर के हितों की रक्षा की जा सके। इसके लिए पार्टी किसी से भी समन्वय करने को तैयार है। बैठक में पार्टी को राज्यभर में मजबूत करने पर विचार विमर्श किया गया। इसके लिए पार्टी रियासत भर में कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। साथ ही महत्वपूर्ण विंगों का पुनर्गठन भी करेगी। बैठक में यह बात भी सामने आई कि कई नेता जो अब पार्टी में नहीं हैं, उन्होंने पार्टी के विकास में अहम योगदान दिया है। राज्य के व्यापक हित में ऐसे लोगों तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में पार्टी के संरक्षक मुजफ्फर हुसैन बेग, अब्दुल रहमान वीरी, अब्दुल हक खान, गुलाम नबी लोन हंजूरा, डॉ. महबूब बेग, सरताज मदनी, नईम अख्तर, पीरजदा मंसूर हुसैन, मोहम्मद अशरफ मीर, निजामुद्दीन भट, फिरदौस टाक, चौधरी हमीद, वेद महाजन, त्रिलोक सिंह बाजवा आदि मौजूद रहे।