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पीडीपी के लावेः संसद में बिल की प्रति फाड़ी तो वफा, उपराज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में गए तो बेवफा

Fri, 01 Nov 2019 05:51 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
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नजीर लावे को पीडीपी ने पार्टी से निकाला - फोटो : सोशल मीडिया
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पांच अगस्त दिन सोमवार...विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाला एक विधेयक पेश किया था। गृह मंत्री अमित शाह ने साथ ही जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 भी पेश किया था।

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उस दिन उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हमेशा से ही अस्थायी रहा है और पहले की सरकारों ने राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में और वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे नहीं हटाया। गृह मंत्री ने कहा, "न तो हम वोट बैंक चाहते हैं और न ही हमारे अंदर राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव है।"

अब बात शुरू करते हैं आज यानी की शुक्रवार को पीडीपी से निष्कासित किए गए राज्यसभा सांसद नजीर अहमद लावे की। पीडीपी ने लावे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगातार बाहर का रास्ता दिखाया है। बात यह है कि गुरुवार को राज्य के नए उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में लावे शामिल हुए थे। इसके बाद पीडीपी में बवाल मच गया और नई सुबह के साथ लावे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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संवैधानिक दृष्टि से देखा जाए तो उपराज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में लावे का शामिल होना राजनीति से बिल्कुल परे है। लेकिन पीडीपी को लावे का शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना नागवार गुजरा। अब आपको रूबरू कराते हैं पांच अगस्त को देश की संसद के भीतर घटी एक घटना से, जहां लावे ने संविधान की मर्यादा को तार-तार कर दिया था। तब लावे एक तरह से पीडीपी के पोस्टर नेता बन गए थे।

पांच अगस्त को संसद में हंगामे के दौरान ही पीडीपी सदस्य नजीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फयाज ने नारे लगाते हुए पोस्टर दिखाए। सभापति ने उनसे ऐसा न करने को कहा। बाहों में काली पट्टी बांधे लावे और फयाज जब आसन के समक्ष आकर विरोध जता रहे थे तब उन्होंने विधेयक की प्रतियां फाड़ कर हवा में उछालीं। इस दौरान लावे ने अपना कुर्ता भी फाड़ लिया। इस पर सभापति ने गहरी नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद सभापति ने मार्शल के जरिये उन्हें सदन से बाहर करने का आदेश दिया।

सभापति ने कहा, "भारत का संविधान सर्वोच्च है। इसके अपमान की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती। इसे फाड़ने का अधिकार किसी को भी नहीं है।" उन्होंने कहा, "सदन में संविधान की प्रति फाड़ने, भारत के खिलाफ नारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मैं न केवल (सदस्यों के) नाम लूंगा बल्कि कार्रवाई भी करूंगा।"

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