रियासत के वित्त मंत्री तथा पीडीपी एमएलए डा. हसीब द्राबू कश्मीर पर बयान देकर घिर गए हैं। पार्टी की अनुशासन समिति ने द्राबू को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। पार्टी का कहना है कि इस बयान से पार्टी के स्टैंड तथा छवि को धक्का पहुंचा है।
द्राबू ने शनिवार को दिल्ली में कहा था कि कश्मीर राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है। पीडीपी के उपाध्यक्ष सरताज मदनी ने द्राबू से सफाई देने को कहा है। कहा कि पीडीपी मानती है कि जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है और केवल बातचीत से ही हल संभव है।
द्राबू ने कोर इश्यू पर पार्टी के स्टैंड के विपरीत बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना इसी कोर इश्यू के साथ की थी। वित्त मंत्री का बयान राजनीतिक एजेंडे से हटकर है।
पार्टी की अनुशासनिक समिति के अध्यक्ष अब्दुल रहमान वीरी ने द्राबू को नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे को समझौते और बातचीत से हल किया जा सकता है। कश्मीर में लोगों ने शहादत दी है। क्षेत्र की समस्या को कुछ लोग केवल प्रबंधन में कमियां बता रहे हैं।
जो ठीक नहीं। कश्मीर के मुद्दे को लेकर कई प्रस्ताव पारित हुए हैं। पार्टी से लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं। शांति के साथ इस मुद्दे को हल करने की पार्टी पक्षधर रही है। पार्टी इस एजेंडे को ईमानदारी से निभाएगी। राजनीतिक स्तर पर 2002 से 2005 तक भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत का बेहतर दौर था।
सीमा पर सीजफायर उल्लंघन रुका था। वर्ष 2014 में हुए चुनावों ने नया इतिहास रचा। पीडीपी को बहुमत नहीं मिला और राज्य के विकास के लिए समझौता करना पड़ा। दोनों देशों को तनाव दूर करके विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नेकां और हुर्रियत ने भी कहा- शर्मनाक
विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस तथा सीपीआई (एम) ने भी द्राबू के बयान पर पीडीपी को घेरते हुए कहा कि यह बयान शर्मनाक है। नेकां के अली मोहम्मद सागर ने द्राबू के बयान को निदंनीय कहा।
हुर्रियत एम के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने द्राबू के बयान को भ्रम फैलाने के लिए सोच समझकर दिया बयान बताया। अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने कहा कि द्राबू का बयान बिकी हुई मानसिकता को दर्शाता है।