जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने साफ कर दिया कि जम्मू की दो सीटों पर पीडीपी कोई भी प्रतियाशी मैदान में नहीं उतारेगी। उन्होने श्रीनगर और अनंतनाग सीटों के लिए आगाह मोहसीन और अपनी दावेदारी भी पेश की गई। वहीं, जेकेएलएफ पर लगाए प्रतिबंध को गलत ठहराया।
महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आज उनकी पार्लियामेंटरी बोर्ड की बैठक थी, जिसमें आने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर विचार विमर्श किया गया। उन्होने बताया कि इस बैठक में जम्मू को लेकर विचार विमर्श किया गया, हालांकि जम्मू-राजौरी सीट पर पिछली बारी हमने पौने दो लाख वोट हासिल किए हैं। महबूबा ने कहा कि हमारे कई साथियों का कहना था कि हुमें वहां से चुनाव लड़ना चाहिए लेकिन जम्मू क्षेत्र में “सेक्युलर वोट” के बटवारे को ध्यान में रखते हुए हमने जम्मू और ऊधमपुर सीटों से कोई भी उम्मीदवार नहीं उठाने का फैसला किया है।
पीडीपी के इस फैसले से लगता है कि जहां नेका ने खुलेआम कांग्रेस का समर्थन किया है वहीं, पीडीपी पर्दे के पीछे से उन्हे समर्थन दे रही है। उन्होने यह भी हम यह नहीं चाहते थे कि हमारे चुनाव लड़ने से “सेक्युलर फोर्सेस” को नुकसान हो क्योंकि हमारे चुनाव लड़ने से करीब ढाई लाख वोट बट सकता है। यह पूछे जाने पर कि फिर वोट किसको जाएगा उन्होने कहा कि हमने अपने समर्थकों पर यह छोड़ दिया है क्योंकि वो नहीं चाहते कि सेक्युलर वोट बटना नहीं चाहिए। इस बीच उन्होने श्रीनगर से आगाह मोहसीन की भी घोषणा की गई और अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती ने पार्टी के लिए अपनी साख को दाव पर लगाते हुए खुद मैदान में उतरने की घोषणा की गई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया। बता दें कि अब्दुल कयूम वानी पहले ही बारामुला से नामांकन भर चुके हैं।
गौरतलब है कि जेकेएलएफ पर लगाए प्रतिबंध को लेकर उन्होने कहा कि डेमोक्रेसी एक बैटल ऑफ आइडियास है और जेकेएलएफ को बैन करना गड़े मुर्दे उखाड़ने की तरह है क्योंकि वो पहले ही बंदूक को त्याग चुके हैं। यह जो हो रहा है गलत हो रहा है। पहले जमात-ए-इस्लामी फिर जमात-ए-अलहदीस और अब जेकेएलएफ, ऐसा लगता है कि चुनावों में फायदा लेने के लिए कश्मीरियों को दांव पर लगाते हुए वो यह दिखाना चाहते हैं कि हम बड़े मजबूती से कश्मीर से निपट रहे हैं।