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कारगिल गाथा: घायल संजय ने दुश्मन के हथियार से ही किया दुश्मन का सफाया

ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 06 Jul 2016 12:22 PM IST
परमवीर चक्र राइफलमैन संजय कुमार - फोटो : ADGPI
प्वाइंट 4875 पर राइफलमैन संजय कुमार की बहादुरी ने भारतीय सेना को आगे बढ़ने का आधार दिया था। एक दिन पूर्व ही इस प्वाइंट पर संजय कुमार की चीते सी फुर्ती से दुश्मन पर कहर बनकर टूटी थी। 13 जैक राइफल के संजय कुमार प्वाइंट 4875 पर पहुंचे ही थे कि उनका सामना दुश्मन के आटोमैटिक फायर से हो गया। 

टकराव इतना नजदीक से हुआ कि संजय कुमार तीन दुश्मनों के साथ गुत्थमगुत्था हो गए। हैंड टू हैंड फाइट में संजय कुमार ने तीनों को मौत के घाट उतार दिया। दुश्मन टुकड़ी के शेष जवान घबराहट में अपनी यूनिवर्सल मशीन गन छोड़कर भागने लगे। बुरी तरह से घायल संजय कुमार ने उसी यूएमजी से भागते दुश्मनों को भी ढेर कर दिया। 

संजय कुमार की इस दिलेरी ने अन्य जवानों में नई जान फूंक दी। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले संजय कुमार को इसी अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र का सम्मान मिला। 5 जुलाई को प्वाइंट 4875 और सटी चोटियों को वापस हासिल करने के लिए मेजर एसवी भास्कर, मेजर गुरप्रीत सिंह, मेजर विकास वोहरा और कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में टीमें आगे बढ़ीं। 

संजय कुमार द्वारा रखी गई जीत की नींव पर इन टीमों ने टाइगर हिल के शिखर सहित डॉग हिल, स्टैंग्पा नार्थ पर कब्जा कर लिया। लद्दाख स्काउट्स के नायब सूबेदार ताशी छेपाल का साहसिक नेतृत्व मिसाल के रूप में उभरा।
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तोलोलिंग के बाद टाइगर हिल पर चढ़े थे मदन लाल

जम्मू शहर से सटे इलाके के रहने वाले मदन लाल ने कारगिल युद्ध के सबसे मुश्किल मोर्चे तोलोलिंग पर तिरंगा फहराया था। 18 ग्रेनेडियर को जब टाइगर हिल फतह करने का जिम्मा मिला तो घातक टीम के पांच कमांडो हवलदार मदन लाल के नेतृत्व में आगे बढ़े थे। 

सत्रह साल पहले का दृश्य साझा करते हुए मदन लाल के छोटे बेटे दीपक ने बताया तोलोलिंग पर पिता द्वारा तिरंगा फहराने की खबर ने परिवार को गर्व की अनुभूति करवाई थी, लेकिन टाइगर हिल में उनकी शहादत से परिवार टूट सा गया। वह पांच साल बाद ही रिटायर होने वाले थे। 

मदन लाल की पत्नी कमला देवी, बेटे दीपक, विनोद और बेटी रचना देवी के सिर से मुखिया का साया उठ चुका था। दीपक ने बताया कि उनके ज्यादातर रिश्तेदार सेना में हैं। पिता की शहादत के बावजूद वह खुद भी सेना ज्वाइन करना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी से ऐसा नहीं कर पाए। मदन लाल के परिवार ने मंगलवार को 17वीं बरसी पर लंगर का आयोजन किया।
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