परगवाल में अपनी गिरी वासमति देखता किसान
परगवाल। बाढ़ से पहले ही प्रभावित हो चुकी किसानों की धान की फसल पर अब मौसम की दोहरी मार पड़ी है। पिछले शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी धान की फसल खासकर बासमती को जमीन पर बिछा दिया था। इसको लेकर किसान चिंतित थे। वहीं, सोमवार को एक बार फिर मौसम की उठापटक का असर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर गया।
किसान पूर्ण चंद, केहर सिंह और पानु राम ने बताया कि उनकी बासमती पहले से ही खेतों में गिर गई थी और वह किसी तरह उसको पालने में जुटे थे। वहीं तड़के हुई बारिश ने उनको गहरी चिंता में डाल दिया है कि अब उनका क्या होगा। स्थानीय किसान गिरधारी शर्मा, गणेश दास, बिशन लाल और परवान सिंह ने कहा कि बाढ़ से पहले ही काफी नुकसान हुआ था, अब जब थोड़ा बहुत बचा था, बारिश और हवा ने रही सही उम्मीद भी छीन ली। अब लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे प्राकृतिक प्रकोप से किसानों की कमर टूट चुकी है और सरकार को तत्काल राहत की घोषणा करनी चाहिए। संवाद