विधानसभा चुनाव में पैंथर्स पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है। पार्टी को इस बार एक भी सीट नसीब नहीं हुई। 1996 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।
पार्टी की इस हार ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। ऐसे में पार्टी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए मंथन की तैयारी कर रही है। एक दो दिन में पार्टी इसे लेकर बैठक करेगी। पार्टी के तीन विधायकों को हार मिली है।
रामनगर से पार्टी के विधायक हर्ष देव सिंह, उधमपुर से बलवंत सिंह मनकोटिया और सांबा से यशपाल कुंडल को शिकस्त मिली है। तीनों से पार्टी को काफी उम्मीदें थी, लेकिन एक भी सीट हासिल नहीं हो पाई। यहीं नहीं, जिन प्रत्याशियों ने पिछले चुनाव में ठीकठाक वोट हासिल किए थे, वह अपनी जमानत बचाने में भी सफल नहीं हो सके।
1983 के चुनाव में पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी। इसके बाद 1996 में पार्टी को एक सीट मिली। वर्ष 2002 के चुनाव में पार्टी को चार सीटें मिली तो लगा कि पैंथर्स पार्टी भी आने वाले वर्षों में एक बड़ी पार्टी बन सकती है, लेकिन वर्ष 2008 के चुनाव में पार्टी को एक सीट गंवानी पड़ी।
वहीं इस बार के चुनाव में पार्टी को सभी तीनों सीटें गंवानी पड़ी हैं। इसे लेकर पार्टी में मायूसी है। पार्टी के राज्य प्रधान और उधमपुर से हारने वाले बलवंत सिंह मनकोटिया ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि वह लोगों के निर्णय का स्वागत करते हैं।
यह भी स्वीकार किया कि कहीं न कहीं कमियां रही हैं, तभी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी इस पर गंभीरता से विचार करेगी। एक दो दिन में पार्टी की बैठक होगी। पार्टी आने वाले वर्षों में मजबूत इरादा और लोगों का विश्वास लेकर काम करेगी।