बौखलाहट में बीते वीरवार को सीजफायर का उल्लंघन कर पाक रेंजरों ने भीषण गोलाबारी की थी। भारत ने भी उसका मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसके बाद पाक रेंजर पस्त हो गए। बीते दो दिनों से पाक ने इस क्षेत्र में कोई दुस्साहस नहीं दिखाया है।
हालांकि सीमा पर तनाव का माहौल बरकरार है। सीमावर्ती ग्रामीण भी सहमे हैं। बदले माहौल में छलनी दीवारें उन्हें सिहरा कर रख देती हैं। लोग अगला कदम भी सहमे-सहमे रखते हैं।
पाक गोलाबारी से प्रभावित सीमावर्ती ग्रामीणों का कहना है कि पाक अभी भले ही पस्त होता प्रतीत हो, लेकिन वह अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आ सकता। लंबे समय वह इसी पर चलता आ रहा है।
इसका खामियाजा सीमावर्ती ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है। अचानक सभी को बेघर होना पड़ता है। खेतीबाड़ी प्रभावित होती है। बेजुबान पशु-पक्षी नापाक हरकत का देखते-देखते शिकार हो जाते हैं। यहां कभी भी पाक रेंजरों की गोलाबारी कहर बरपा सकती है।
क्षेत्र के बूटी राम, राम लाल, पूर्ण चंद, फकीर चंद, अतर सिंह, राकेश गुप्ता, मोनू गुप्ता का कहना है कि पाक भारत के साथ विश्वास घात करता रहा है। थोड़ी खामोशी के बाद वह सीमा पर माहौल खराब करने और सीमावर्ती ग्रामीणों में दहशत कायम रखने की मंशा के तहत अपनी हरकत पर उतर आता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार भी पाक गोलाबारी में तीन ग्रामीण घायल हुए हैं। हालांकि हमने हौसला नहीं खोया है। हम अपने जवानों के दम पर अपनी मिट्टी से आज भी उतना ही प्यार करते हैं। यही वजह है कि दहशत के बावजूद यहां के लोग जान हथेली पर रखकर खेतों में जाने से अपने को रोक नहीं पाते।
ग्रामीण बताते हैं कि वर्तमान में राहत की बात यह है कि गेहूं की फसल खेतों में लगी है, जिसकी हर रोज देखरेख की जरूरत नहीं पड़ती। फिर भी दवा का छिड़काव आदि करने के लिए कभी कभार जाना पड़ता है।