रियासत में होने वाले शहरी निकाय और पंचायत चुनाव में अन्य पार्टियों के मुकाबले में भाजपा और पीडीपी की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। जमीनी स्तर से जुड़े इन चुनावों के बाद रियासत में लोकसभा चुनाव से पहले राज्य के मतदाताओं का रुझान किस करवट हैं। वह भी देखने को मिल जाएगा।
रियासत में पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार तीन साल से ज्यादा रही है। ऐसे में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस व अन्य पार्टियों की तुलना में सरकार में रही पार्टियों पर जन आकांक्षाओं के मामले में ज्यादा दबाव भी है। जम्मू में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी और कश्मीर में पीडीपी की।
हाल ही में लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल की 26 सीटों पर आए चुनाव नतीजों के मामले में नेशनल कांफ्रेंस के दस सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनना और कांग्रेस के आठ सीटों के बाद दूसरे नंबर पर रहने के बाद पीडीपी और भाजपा पर निकाय और पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव ओर बढ़ गया है।
हालांकि पंचायत चुनाव पार्टी के झंडे पर नहीं लड़े जाते, लेकिन पर्दे के पीछे पार्टियों के ही उम्मीदवार इसमें उतारे जाते हैं। लोकसभा चुनाव से पूर्व रियासत में एक से पांच अक्तूबर के बीच होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पार्टियों ने पूरी ताकत झोंकने की तैयारी शुरू कर दी है।