लश्कर के टॉप कमांडर दुजाना के अंत में सुरक्षा एजेंसियों की मदद सबसे ज्यादा उसके छूटे आईफोन और उसके तमाम लड़कियों के कनेक्शन से हुई। कश्मीर की कई आतंकी वारदातों के बाद दुजाना को मोस्ट वांटेड घोषित कर चुकी सेना को उसे ढूंढने की राह में उसका आईफोन सबसे बड़ा रास्ता बन गया। दुजाना के तमाम लड़कियों से बातचीत को कोड्स को इंटरसेप्ट कर सेना और पुलिस को उस तक पहुंचने में सबसे ज्यादा मदद मिली।
दरअसल दुजाना को मार गिराने के लिए हुए ऑपरेशन के पीछे सेना को उसके आईफोन से मिले कई नंबरों की प्रमुख भूमिका रही। ये आईफोन पिछले दिनों सुरक्षाबलों के हाथ उस वक्त लगा जब कि उन्होंने दुजाना को दक्षिण कश्मीर के एक इलाके में घेरा।
इस आईफोन में दुजाना के कई ऐसे नंबर मिले जिनपर उसकी लगातार बातचीत होती थी। सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया विभाग की मदद से इन नंबरों के पीछे के चेहरों को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि इनमें कई नंबर लड़कियों के हैं।
किसी फातिमा से दूर रहने की मिली थी हिदायत
अबु दुजाना
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सबसे पहला नंबर किसी फातिमा नाम की लड़की का था जिससे दुजाना की सबसे ज्यादा बातचीत होने की बात सामने आई। वहीं इस फोन से दुजाना के पाकिस्तान कनेक्शन का भी पता चला। 2010 में पाक से घुसपैठ कर कश्मीर में दाखिल हुए दुजाना को पाकिस्तान से किसी हैंडलर से निर्देश मिलने की बात सामने आई है।
वहीं दुजाना के फोन से एक ऑडियो भी मिला है जिसमें पाक हैंडलर द्वारा पाकिस्तान को फातिमा नाम की लड़की से दूर रहने का मशविरा दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि सेना ने अब तक इस ऑडियो की पुष्टि तो नहीं की है लेकिन ये कहा जा रहा है कि ये बातचीत पाक में हाफिज के करीबी सैफुल्लाह सज्जाद जट से हुई थी।
वहीं दुजाना के मोबाइल से कई अन्य लड़कियों के फोन नंबर भी बरामद हुए जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ संदिग्ध नंबरों की लिस्ट को सर्विलांस पर रखना शुरू कर दिया। इनमें एक नंबर दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले की शाजिया नाम की किसी लड़की का होने की बात कही गई है।
गर्लफ्रेंड से मिलने पुलवामा आया था दुजाना
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ये भी माना जा रहा है कि दुजाना शाजिया से मिलने ही पुलवामा आया था और इसी दौरान हुई बातचीत को इंटरसेप्ट कर सेना को उसकी लोकेशन पता चली। इसके बाद सेना की 55 आरआर, एसओजी और सीआरपीएफ द्वारा पुलवामा में सुबह से ही ऑपरेशन शुरू कर दिया गया जिसके बाद हुई मुठभेड़ में दुजाना का अंत कर दिया गया।
दुजाना का खात्मा भी कुछ ऐसे ही हुआ जैसे कि पिछले साल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी का हुआ था। साल 2016 में 8 जुलाई को मारे गए बुरहान को उस वक्त ढेर किया गया था जब कि वो अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गया था। वहीं हिजबुल और लश्कर के कुछ अन्य आतंकियों को भी मारने के पहले सेना को मिले इनपुटों में आधार वो बातचीत बनी जो इन आतंकियों ने तमाम लड़कियों से की थी।