जम्मू-कश्मीर में बहुचर्चित बाग-ए-बाहु के राजीव नगर नरसंहार में 17 साल बाद कोर्ट के एक फैसले में पाकिस्तानी नागरिक को हत्या मामले में रिहा कर दिया गया है। प्रतिवादी पक्ष पाकिस्तानी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा। 2002 में राजीव नगर में आतंकियों ने नरसंहार किया था। इसमें 29 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए थे। दो पाकिस्तानी आतंकियों ने उक्त इलाके में अंधाधुंध गोलीबारी की थी।
शुक्रवार को सांबा के जिला कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। यहां जिला जज एमके शर्मा ने पाकिस्तान में मुल्तान के कसबा मादिल के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला पुत्र हसन बक्श को रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले जज ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। 13 जुलाई 2002 को आतंकी शाम सात बजे राजीव नगर में घुसे थे।
आतंकियों ने घुसते ही नरसंहार शुरू कर दिया। गोलीबारी के साथ ग्रेनेड से हमले करते गए। इसमें 29 लोग मारे गए। इस कांड में दो आतंकी मारे गए। बाद मेें जब मामले की जांच शुरू हुई तो पुलिस ने 79 गवाह चुने। लेकिन 13 को मुख्य रूप से गवाह बनाया गया।