गांव नूूंना बांडी निवासी किसान खुर्शीद अहमद का परिवार मंगलवार को हुई पाकिस्तानी गोलाबारी में बाल-बाल बच गया। इसे लेकर खुर्शीद अहमद का कहना है कि हम मंगलवार को भी और बुधवार को भी खेतों में मक्की छीलने का काम कर रहे थे। परिवार की महिलाओं के साथ ही करीब आधा दर्जन रिश्तेदार महिलाएं भी काम कर रही थीं कि तभी 3.45 बजे एक गोला खेतों में आकर गिरा, जो पेड़ के साथ आकर फटा। जब तक कुछ समझ पाते तब तक दूसरा गोला उससे कुछ दूरी पर आ गिरा, जिसके बाद हमने भाग कर जान बचाई। आज गोलाबारी बंद होने के कारण दोबारा मक्की की छिलाई में लगे हैं।
इनका कहना है कि इस गांव में पहले कभी गोले नहीं गिरते थे, लेकिन अब पाकिस्तानी सेना ने रेंज बढ़ा दी है और यहां गोले गिर रहे हैं। हमारे पास जान बचाने के लिए बंकर भी नहीं है। हम सरकार से मांग करते हैं कि हमें भी पक्के बंकर दिए जाएं और दूसरा पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए उससे पीओके वापस लिया जाए ताकि हम लोगों से बॉर्डर दूर हो जाए और हम अमन से जी सकें।