सीमा पार से पाक की नापाक गोलाबारी से दोनों देशों के बीच तल्खी तो बढ़ ही रही है, आम जिंदगियों के खतरे में पड़ने के साथ ही बारूद की गंध में सीमांत बच्चों का बचपन भी छिन रहा है। भय से सीमावर्ती क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
बाजार सूने पड़े हैं। भारी तादाद में लोग पलायन कर चुके हैं। कई सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी में हैं। डर इस कदर है कि लोग बच्चों को घर से बाहर निकलने देने से कतराने लगे हैं। स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
आम दिनों में गुलजार रहने वाले खेल के मैदान में भी रौनक नहीं है। पिछले कई महीनों से पाक लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है।
हंसती-खेलती दुनिया उजड़ गई
इस महीने अब तक दस से ज्यादा बार संघर्ष विराम तोड़ा जा चुका है। सूरज ढलते ही सीमा पार से भारी गोलाबारी शुरू हो जा रही है। राजोरी, पुंछ, अरनिया, अखनूर, आरएस पुरा सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में लोगों में जबरदस्त भय है।
खासकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी किए जाने से उन्हें हर वक्त भय सता रहा है कि क्या पता कब पाक की ओर से की गई गोलाबारी उनके आशियाने पर गिर जाए और उनकी हंसती-खेलती दुनिया उजड़ जाए।
अरनिया में दहशत के चलते मंगलवार को स्कूल, बाजार, बैंक तथा एटीएम तक बंद रहे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहली बार अरनिया शहर को निशाना बनाकर गोलाबारी की गई है।
अरनिया के 25 गांव के लोगों का पलायन
हालांकि, इसके पहले आसपास के इलाकों में गोलाबारी होने पर वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। लोगों का कहना है कि पाक गोलाबारी से रोजगार तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
आए दिन फायरिंग के चलते बच्चों का स्कूल छूट जाता है। खेलकूद भी बंद है। बचपन एक तरह से कैद होकर रह गया है। राजोरी, अखनूर तथा अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लोगों में खौफ है।
अरनिया शहर तथा सीमांत 25 गांव के तकरीबन 42 हजार लोग पलायन कर सुरक्षित स्थान पर जा चुके हैं। इनमें अकेले शहर के लगभग 17 हजार लोग शामिल हैं। प्रशासन की ओर से चार स्थानों पर कैंप बनाए गए हैं जहां लोग बच्चों के साथ पहुंचे हैं। अब उन्हें घर लौटने में डर लग रहा है।
आरएस पुरा के 27 गांव हुए खाली
आरएस पुरा इलाके के 27 गांव के लोग अपना घर बार छोड़ चुके हैं। वे तीन स्थानों पर बने कैंप में शरण लिए हुए हैं, ताकि उनके जानमाल की सुरक्षा हो सके। यहां के लोग दिन में भी घर जाने से डर रहे हैं।