आतंकवादियों और अलगाववादियों ने हमेशा जम्मू कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की है। अब चुनाव आयोग का फैसला बताएगा कि केंद्र समय पर चुनाव कराने के अपने फैसले पर दृढ़ है अथवा इन अलगाववादी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह बात शुक्रवार को नेशनल कांफ्रेंस के उप प्रधान उमर अबदुल्ला ने श्रंखलाबद्ध तरीके से किए गए ट्वीट के जरिए कही।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में चुनाव आयोग का फैसला सामने आ जाएगा और इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं।
मालूम हो कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के नेतृत्व में चुनाव आयोग की एक टीम ने सोमवार को जम्मू और कश्मीर का दौरा किया, ताकि यह आकलन किया जा सके कि राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ लोकसभा चुनाव के साथ हो सकते हैं या नहीं। चुनाव आयोग की टीम के साथ बातचीत के दौरान सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनावों के साथ- साथ विधानसभा चुनाव कराने का आह्वान किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 1995-96 से पाकिस्तान, आतंकवादी और अलगाववादी हमेशा यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि जम्मू कश्मीर में चुनाव समय पर न हों। एच डी देवेगौड़ा के बाद से सभी सरकारों ने ऐसे सभी प्रयासों को विफल कर दिया है। अब सबकी निगाहें मोदी जी पर टिकी हैं कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव समय पर होंगे अथवा नहीं।