फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बंकरों का निर्माण करने में जुटा पाकिस्तान

Sun, 23 Oct 2016 02:11 PM IST
kapil sharma बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
विज्ञापन
Pakistan Border
विज्ञापन
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर आरएस पुरा सेक्टर के दूसरी तरफ सियालकोट सेक्टर से सटी सीमा पर बंकरों का निर्माण करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को बीएसएफ ने कोरोटाना गांव के ठीक सामने पाकिस्तान द्वारा सीमा पर बनाए जा रहे बंकर पर आपत्ति भी जताई थी।
विज्ञापन


माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच उत्पन्न तनाव के बीच पाकिस्तान पूरी तैयारियों में जुटा हुआ है। बीएसएफ के आईजी डीके उपाध्याय का कहना है कि सीमा पर पूरी पैनी निगाह है। दुश्मन की हर गतिविधि की जानकारी रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटने के लिए फोर्स तैयार है। पाकिस्तानी रेंजरों की किसी भी नापाक करतूत पर विरोध भी जताया जाता है। 

किसान नें बंकर का निर्माण होते देखा

इंडो पाक बॉर्डर पर बीएसएफ ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था - फोटो : फाइल फोटो
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अरनिया से लेकर अब्दुल्लियां तक जगह-जगह अपने पोस्ट के करीब बंकरों का निर्माण शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर पहले से बंकर थे, लेकिन, कई जगह अब नए सिरे से बंकर बनाए जा रहे हैं। बंकर के रास्ते काफी दूर से ही पोस्टों पर पहुंचा जा सकता है।

इसके साथ ही पोस्ट के आसपास पक्की दीवार बनाने का भी काम चल रहा है। ग्रामीणों की मानें तो यह काम पिछले कुछ दिनों से चल रहा है। बताते हैं कि शुक्रवार को एक किसान तारबंदी के पास अपने खेत में धान की फसल काटने गया था, तभी उसने पाकिस्तान को सीमा पर बंकर का निर्माण करते देखा। इसके बाद उसने बीएसएफ को इसकी सूचना दी। 
विज्ञापन

सीमांत किसानों को सता रही है फसल की चिंता

खेती पर खतरा - फोटो : फाइल फोटो
कोरोटाना के बचन लाल का कहना है कि सीमा पर पाकिस्तान ने बंकर बनाना शुरू किया था जिसका बीएसएफ ने विरोध किया। पाक रेंजरों से बीएसएफ की तकरार भी होती रहती है। नाराजगी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान तो हमारी सुनता नहीं, पर पाक की आपत्ति के चलते गांव के पास भारतीय पोस्ट पर ट्यूबवेल के कमरे की दीवार नहीं बन पाई। 

पाकिस्तानी गोलाबारी की दहशत में शुक्रवार की रात सीमांत ग्रामीणों ने डरे सहमे गुजारी। मवेशियों की चिंता, फसल की चिंता ने किसानों को बेहाल और परेशान कर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि 20 दिन भी सरहद पर शांति बनी रहे तो वो अपनी फसल समेट लेंगे। पर यदि अगले कुछ दिन तक माहौल नहीं सुधरा तो उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें