भारतीय इलाकों में पाकिस्तानी सेना ने चीन निर्मित गोले दागने शुरू कर दिए हैं। पहले पाकिस्तान निर्मित गोले आकर गिरते थे और अब चीन निर्मित गिर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में लंबी दूरी के मोर्टार से गोले बरसाए जा रहे हैं।
पहले बीएसएफ की पोस्टों को निशाना बनाकर हमला किया जा रहा था, लेकिन अब रिहायशी इलाकों को टारगेट किया जा रहा है। इसकी आड़ में किसी बड़ी घुसपैठ कराने की कोशिश है। सूत्रों की मानें तो आतंकवादियों का एक दल बॉर्डर से घुसपैठ भी कर चुका है।
आरएस पुरा और अरनिया के इंटरनेशनल बॉर्डर स्थित गांवों में पाकिस्तान ने अब लंबी दूरी तक मार करने वाली मशीनों से गोले दागना शुरू कर दिया है। पहले 81 एमएम के गोले दागे जाते थे। अब 83, 85 और 120 एमएम के गोले दागे जा रहे हैं। इससे अधिक नुकसान कर रहे हैं।
ऐसे मोर्टार भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो खेतों में गिरने पर भी फट रहे हैं। सीमांत गांव में लगाए गए मोबाइल टावरों को भी निशाना बनाकर हमला किया जा रहा है। मोबाइल टावरों पर रात को जगने वाली लाइटें पाकिस्तानी रेंजरों का सॉफ्ट टारगेट बनी हुई हैं। पांच किलोमीटर तक मार करने वाले 120 एमएम के गोलों से गोलाबारी
200 गांवों के लोग रात को जाग रहे
पाकिस्तानी गोलाबारी ने सैकड़ों गांव में रहने वाले लाखों लोगों की नींद हराम कर दी है। अब तक पाकिस्तान ने अरनिया और आरएस पुरा के आधा दर्जन गांव में गोलाबारी की है, लेकिन इसका असर तीन जिलों के 200 गांवों में दिख रहा है। जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास करीब 200 गांव हैं, जो बॉर्डर से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर हैं।