राष्ट्रमंडल संसदीय एसोसिएशन (सीपीए) की बैठक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को न बुलाए जाने का ताजा विवाद पाकिस्तान की नापाक मंशा को स्पष्ट कर रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवा देने की कोशिश कर रहा है।
उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों में फिर से वार्ता शुरू करने की सहमति पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को रास नहीं आई। इसके चलते इसी महीने दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले इस्लामाबाद के नए पैंतरे सामने आ रहे हैं।
अब पाकिस्तान की ओर से रियासत के विधानसभा अध्यक्ष को सीपीए की बैठक में नहीं बुलाने के निर्णय ने पाकिस्तान को एकबार फिर बेनकाब कर दिया है। सीपीए संविधान के अनुसार प्रत्येक सदस्य इसमें भाग लेने का अधिकारी है।
भारत की ओर से सीपीए के क्षेत्रिय अधिकारी की ओर से सीपीए के कार्यकारी जनरल सेक्रेटरी को अप्रैल के महीने में यह जानकारी दी गई थी कि जम्मू कश्मीर ब्रांच को छोड़कर सभी ब्रांच को न्योता भेजा जा चुका है।