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अलगाववादियों को साथ लेकर चलना पाक की मजबूरी

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भारत के विदेश मामलों के रणनीतिकारों का मानना है कि फिलहाल अलगाववादियों की अजीज के साथ मुलाकात को तूल नहीं दिया जाए। भारत-पाक के बीच किसी भी बड़ी बातचीत के पहले सीमा पर गोलीबारी, आतंकी हमले और अलगाववादियों की मुलाकात का वहां की सेना माहौल बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल करती रही है।
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पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने भी भारत को यह कूटनीतिक संकेत दिया है कि वह सेना के इन हथकंडों के प्रभाव में नहीं आए। बैक चैनल बातचीत में पाकिस्तान ने कहा है कि अलगाववादियों को साथ लेकर चलना उनकी राजनीतिक और कूटनीतिक मजबूरी है।

सूत्रों के मुताबिक पाक की लोकतांत्रिक सरकार के भरोसे पर भारत इस वार्ता को सफल बनाने के लिए अपनी तरफ से पूरा मौका देगा।
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आतंकवाद और सीमा पर शांति के एजेंडे का साथ आगे बढ़े

गौरतलब है कि रूस के ऊफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच हुए साझा करार में यह तय हुआ था कि बातचीत के आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के परस्पर विरोधी खेमों के पैंतरे को दोनों देश नजरअंदाज करेंगे।

दोनों सरकारों को यह अंदेशा था कि पाक सेना और आईएसआई कश्मीर के बिना किसी भी बातचीत के लिए राजी नहीं होंगे।

जबकि दोनों प्रधानमंत्रियों ने फैसला किया है कि कश्मीर पर बातचीत का माहौल बनाने के लिए पहले आतंकवाद और सीमा पर शांति के एजेंडे का साथ आगे बढ़ा जाए। तब तक कश्मीर और सियाचिन के सभी बिंदुओं पर बैक चैनल के जरिए बातचीत होती रहेगी।
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