भारत के विदेश मामलों के रणनीतिकारों का मानना है कि फिलहाल अलगाववादियों की अजीज के साथ मुलाकात को तूल नहीं दिया जाए। भारत-पाक के बीच किसी भी बड़ी बातचीत के पहले सीमा पर गोलीबारी, आतंकी हमले और अलगाववादियों की मुलाकात का वहां की सेना माहौल बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल करती रही है।
पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने भी भारत को यह कूटनीतिक संकेत दिया है कि वह सेना के इन हथकंडों के प्रभाव में नहीं आए। बैक चैनल बातचीत में पाकिस्तान ने कहा है कि अलगाववादियों को साथ लेकर चलना उनकी राजनीतिक और कूटनीतिक मजबूरी है।
सूत्रों के मुताबिक पाक की लोकतांत्रिक सरकार के भरोसे पर भारत इस वार्ता को सफल बनाने के लिए अपनी तरफ से पूरा मौका देगा।