सीमा से सटे गांवों को मिशन हिफाजत के तहत खाली करवा लिया गया है। इन गांवों में जिस ओर नजर दौड़ाओ, वहां मोर्टार के छर्रों के निशान तबाही का मंजर दर्शाते हैं। भले वह कुल्लियां गांव हो या फिर चक फकीरा, मंगू चंक।
तमाम गांवों के लोग अपने घर से बाहर होने के बावजूद अपने पशुओं को लेकर चिंतित नजर आए। प्रशासन की ओर से स्कूलों में बनाए गए शिविरों में ग्रामीणों ने रैन बसेरा बना लिया है। गांवों के बच्चे गोलाबारी के भय से दूर स्कूल की छुट्टियां बिताने में मस्त रहे। गांव में वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध है।
कारण, अंधेरे में वाहनों की लाइटें सीमा पार बैठे दुश्मनों को हमला करने में मददगार न बन जाएं। एक दिन पहले दोबारा फायरिंग हुई थी। गांव के कुछ मकानों में चंद युवक ही थे। युवकों के अनुसार गोलाबारी के भय और गांव खाली होने के कारण रातभर भौंकते कुत्ते अप्रिय घटना का आंदेशा देते रहे। यही हाल सीमावर्ती इलाकों के ज्यादातर गांवों का है।