Tabarak Hussain Pakistani fidayeen
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दो दशक से भी ज्यादा समय में पहली बार पाकिस्तान ने प्रशिक्षित आतंकी के शव को वापस लिया है। इससे पूर्व आतंकी को अपना नागरिक मानने से इन्कार कर पाकिस्तान शव लेने से मना करता रहा है। सोमवार को आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े तबारक हुसैन (32) के शव को पुंछ जिले में चकां दा बाग स्थित राह-ए-मिलन पोस्ट से पाकिस्तानी सेना को सोमवार सुबह 11.10 बजे सौंपा गया।
तबारक हुसैन का शव पाकिस्तानी सेना को सौंपा गया
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में लश्कर के आतंकी तबारक हुसैन का शव पाकिस्तानी सेना को सौंपा गया। रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि दो दशक से ज्यादा समय में पहली बार पाकिस्तान ने किसी आतंकी का शव वापस लिया है।
सैन्य अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मौत
तबारक पाकिस्तानी सेना का एजेंट और आतंकियों का बेहद प्रशिक्षित गाइड था। 21 अगस्त की रात को राजोरी में नियंत्रण रेखा के नौशेरा सेक्टर में तबारक फिदायीन दस्ते के साथ घुसपैठ करते पकड़ा गया था, जिसकी सैन्य अस्पताल में उपचार के दौरान तीन सितंबर को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
सर्जरी, खून देकर किया बचाने का प्रयास
तबारक को गोलियां लगी थीं, जिसे सर्जरी से बचाने का प्रयास किया गया। अधिकारियों के अनुसार तबारक हुसैन का खून बह गया था। उसे बचाने के लिए सैन्य जवानों ने अपना रक्त दान किया था। तीन सितंबर को राजोरी मिलिट्री अस्पताल में उपचाराधीन तबारक की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। रविवार को पोस्टमार्टम समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सोमवार शव पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया गया।
पाकिस्तानी कर्नल ने भेजा था फिदायीन दस्ता
सेना की 80 इन्फैंट्री ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर कपिल रैना ने 24 अगस्त को बताया था कि तबारक हुसैन एलओसी पर सेना की चौकियों पर फिदायीन हमला करने आया था। तबारक ने पूछताछ में माना था कि फिदायीन दस्ते को हमले के लिए भेजा गया था, जिसके लिए बाकायदा रेकी गई थी।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के कर्नल यूनुस चौधरी ने तबारक को अन्य आतंकियों के साथ रेकी के लिए 30 हजार रुपये भी दिए थे। 21 अगस्त से पूर्व तबारक को नौशेरा सेक्टर में ही 2016 में उसके भाई हारून अली के साथ पकड़ा गया था। उसे नवंबर 2017 में मानवीय आधार पर पाकिस्तान को लौटा दिया गया था।