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सर्जिकल स्ट्राइक से सहमे पाकिस्तान ने खाली कराए बॉर्डर के 300 से ज्यादा गांव

Sat, 01 Oct 2016 11:23 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से
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भारत-पाक सीमा - फोटो : PTI
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घराना वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों के बसेरे में अभी एक माह की देर है लेकिन इस गांव में कभी भी पाकिस्तानी गोले बरसने की आशंका ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। वेटलैंड प्रवासी परिंदों के स्वागत में पलक बिछाए हैं लेकिन पाक गोलों की अनचाही आमद की आशंका किसानों को फेंसिंग पार खेतों में जाने से रोकती है। इस वेटलैंड से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर दहशत भरा सन्नाटा है। एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद खौफजदा पाकिस्तान ने बार्डर के लगभग 300 गांव खाली करा दिए हैं। यह भारतीय सेना की संभावित कार्रवाई के डर के साथ-साथ जंग की तैयारी भी है।
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बार्डर पर पाकिस्तानी रेंजरों की जगह पाक सेना ने मोर्चाबंदी कर ली है। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने भारत के अब्दुलियां गांव से लेकर सुचेतगढ़ तक चार अतिरिक्त ब्रिगेड तैनात की हैं। 

बार्डर की एक अंतिम अग्रिम पोस्ट से रात की ड्यूटी कर कैंप में लौट रहे एक बीएसएफ जवान ने अमर उजाला को बताया कि बीएसएफ के सभी कैंपों पर बार्बर और वाशरमैन रात में पहरे पर लगा दिए गए हैं और एक-एक जवान की तैनाती फारवर्ड पोस्ट पर की गई है। भारत की ओर से अभी बार्डर पर सेना की तैनाती नहीं की गई है।
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भारतीय सीमा पर अभी सेना की तैनाती नहीं

सीमा पर मुस्तैद जवान - फोटो : PTI
कोरटानाखुर्द और आक्ट्राय जैसी संवेदनशील पोस्ट भी बीएसएफ ने ही संभाल रखीं हैं। पाकिस्तानी सेना बार्डर के पास गश्त करने लगी है। तनाव है लेकिन दोनों तरफ से किसी अनजाने तूफान से पहले की खामोशी भी महसूस की जा सकती है। 

बार्डर से सटे पाकिस्तानी गांव नंदपुर, सुरगपुर, चरपाड़, बनूट, कजरियाल, कसीरे, गुरर्ग, ऊंचेबेस, ठठियानिन्दरवाल और कुननपुर में अब एक भी बाशिंदा नहीं है। पाक सेना ने इन गांवों के लोगों को बार्डर से 10-15 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।
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पाकिस्तान के खेतों में नहीं दिख रहे किसान

भारत-पाक सीमा - फोटो : PTI
बीएसएफ के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के बासमती धान से भरे खेतों में भी खाद डालने अब कोई किसान नहीं आता। दोनों ओर फसलें पकने में अभी डेढ़ माह और लगेंगे। इस बीच जंग की आशंका से भारतीय किसानों को भी फसलों का चिंता सताने लगी है। 

सुचेतगढ़ की तहसीलदार सविता चौहान ने बताया कि उनके क्षेत्र के 104 भारतीय गांवों को खाली करने का आदेश दिया गया है लेकिन कई गांवों में ग्रामीण अब भी डटे हैं। आरएसपुरा और मीरां साहिब में ग्रामीणों के लिए बनाए कैंपों में गिने-चुने लोग ही आए हैं।

सुचेतगढ़ के नम्बरदार बुजुर्ग वेली राम कहते हैं कि गांव छोड़कर कही नहीं जाएंगे। फौज हमारी चिंता नहीं करे, हम गोली खा लेंगे लेकिन एक बार पाकिस्तान का घमंड तोड़ना जरूरी है। आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए। हम हर साल पाक की गोलाबारी झेलते हैं, इस बार भी झेल लेंगे। लेकिन एक बार दुश्मन के दांत खट्टे हुए तो वह फिर सिर नहीं उठा सकेगा। 
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