लश्कर ए तैयबा के पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद याकूब को कोट भलवाल जेल में जनरल बैरक में रखना सुरक्षित नहीं है। यह खुलासा जेल सुपरिंटेंडेंट की ओर से एनआईए की विशेष अदालत को लिखे एक पत्र में हुआ है।
पत्र में लिखा गया कि अदालत ने 30 सितंबर के आदेश में नावेद और उसके दो साथियों को आब्जर्वेशन ब्लाक में नहीं रखने के निर्देश दिए थे। इस पर जेल सुपरिंटेंडेंट ने विशेष जज को लिखे पत्र में कहा कि नावेद और उनके साथी शौकत अहमद भट और खुर्शीद अहमद भट को जनरल बैरक में रखने की बजाए आबजर्वेशन ब्लाक में ही रखने की इजाजत दी जाए।
पत्र में कहा गया कि कोट भलवाल जेल में कई कुख्यात आतंकी कैद हैं और यदि उन्हें जनरल बैरक में रखा जाता है तो उनके साथ लड़ाई झगड़ा हो सकता है। पत्र में अदालत से तीनों आतंकियों को अलग रखने की इजाजत मांगी गई है।
जेल पहले भी एक पाक कैदी की हो चुकी है हत्या
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी जेल में कैदियों के बीच मारपीट के कुछ ऐसे हादसे हुए हैं, जिसमें कैदी की मौत भी हो चुकी है। 2013 में पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रंजय (निवासी सियालकोट) को भारतीय कैदी ने हथौड़ी से सिर पर वार किया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।
मंगलवार को भी जब तीनों आतंकियों को अदालत में पेश किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें बंद कोठरी में रखा जा रहा है। सिर्फ 2-3 घंटे के लिए ही बाहर निकाला जाता है। इस पर अदालत ने उन्हें कहा कि यह आपकी सुरक्षा के लिए ही है।
वर्तमान में नावेद अलग कोठरी में है, जबकि अन्य दोनों आतंकी अलग कोठरी में हैं। उन्होंने अदालत से एक साथ रखने की भी अपील की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
मोहम्मद नावेद सहित तीन की न्यायिक रिमांड फिर बढ़ी
पांच अगस्त को उधमपुर में बीएसएफ के काफिले पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद सहित तीन की न्यायिक रिमांड फिर बढ़ दिया गया है। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने नावेद के अलावा ड्राइवर खुर्शीद अहमद भट और शौकत अहमद भट को एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया।
एनआईए के आवेदन पर अदालत ने उनकी न्यायिक रिमांड 14 दिनों के लिए बढ़ा दी। एनआईए के पीपी ने दलील दी कि इस मामले में अभी अन्य लोगों की गिरफ्तारी में एनआईए लगी है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद इनसे पूछताछ की आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए इन्हें फिलहाल न्यायिक रिमांड पर भेजा जाए। न्यायालय ने उनकी रिमांड अवधि 26 अक्तूबर तक बढ़ाते हुए आदेश दिए कि तीनों की नियमित तौर पर 48-48 घंटे में मेडिकल जांच करवाई जाए।
इस दौरान ड्राइवर खुर्शीद अहमद ने अदालत से लश्कर के वर्कर खुर्शीद अहमद और शौकत अहमद (दोनों निवासी कुलगाम) ने पाकिस्तानी आतंकियों को हमले से पहले जेएंडके में एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाने में मदद की थी। वर्तमान में तीनों आतंकी जम्मू के कोटभलवाल जेल में बंद हैं।