पहलगाम में हुई हत्याओं के विरोध में बंद के आह्वान का सभी संगठनों ने समर्थन किया। यह पहला मौका है कि अलगाववादी संगठन ने भी पाकिस्तान के खिलाफ बंद का आह्वान किया। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक की अध्यक्षता वाले कई धार्मिक संगठनों के एक समूह मुताहिदा मजलिस उलेमा (एमएमयू) ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से बुधवार को बंद करके इस जघन्य अपराध का विरोध करने की अपील की थी।
बुधवार को श्रीनगर, पहलगाम व अन्य इलाकों में दुकानें, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। केवल जरूरी सामान की दुकानें खुलीं। सार्वजनिक परिवहन भी न के बराबर रहा। इक्का-दुक्का निजी वाहन सड़कों पर दौड़ते नजर आए।
सरकारी स्कल खुले, लेकिन निजी स्कूल बंद रहे। लाल चौक और अन्य इलाकों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी मेहराज अहमद ने कहा, आज से करीब एक दशक पहले कश्मीर के लोग हिंदुस्तान के खिलाफ प्रदर्शन (अलगाववादियों के कहने पर) करते थे, लेकिन आज हम पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हुए हैं, जो यहां शांति देखना नहीं चाहता। ब्यूरो
नेकां, पीडीपी समेत सभी राजनीतिक, धार्मिक सामाजिक संगठनों ने किया बंद का समर्थन : पहलगाम के बायसरन में आतंकी हमले के विरोध में कई राजनीतिक दलों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों, व्यापार निकायों और नागरिक समाज समूहों ने कश्मीर बंद का आह्वान किया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और अपनी पार्टी ने बंद का समर्थन किया।
मुस्लिम संगठनों ने आतंकवाद को बताया कैंसर
जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने पहलगाम हमले की निंदा की। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, इस घटना को धार्मिक रंग देना गलत है, क्योंकि आतंकवाद एक कैंसर है, जो इस्लाम की शांति को बढ़ावा देने के संदेश के विपरीत है।
अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष इमाम उमर अहमद इलयासी ने कहा, देश की 5.5 लाख से अधिक मस्जिदों के इमाम इस सप्ताह जुमे की नमाज के दौरान पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के लिए दुआ मांगने के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देंगे। धर्म के आधार पर निर्दोष लोगों की हत्या करना इस्लाम व मानवता के खिलाफ है।