जम्मू। हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत 11 कर्मचारियों को देश विरोधी गतिविधियों में बर्खास्त किए जाने के विरोध में पीडीपी व नेकां उठ खड़ी हुई है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इन 11 सरकारी कर्मचारियों को मामूली आधारों पर बर्खास्त करना अपराध है। केंद्र संविधान को रौंदकर छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर बना रहा है।
महबूबा ने ट्वीट किया कि भारत सरकार उस संविधान को रौंदकर छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू-कश्मीर के लोगों को निशक्त बनाना जारी रखे हुए है, जिसे बरकरार रखा जाना चाहिए। तुच्छ आधारों पर 11 सरकारी कर्मचारियों की अचानक बर्खास्तगी अपराध है। जम्मू-कश्मीर के सभी नीतिगत फैसले कश्मीरियों को दंडित करने के एकमात्र उद्देश्य से किए जाते हैं। ज्ञात हो कि शनिवार को राज्य सरकार ने सलाहुद्दीन के दो बेटों, दो पुलिसकर्मियों समेत 11 कर्मचारियों को देशविरोधी गतिविधियों तथा आतंकियों से गठजोड़ के आरोप में बर्खास्त कर दिया था।
वहीं, नेकां ने भी बर्खास्तगी की निंदा करते हुए कहा कि यह कदम न्याय के लिए अंधा और प्रकृति में मनमाना था। पार्टी प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि यह उपाय मनमानी का प्रथम दृष्टया मामला है जहां एक गैर न्यायिक संस्था आरोपी को आरोपों से लड़ने का उचित मौका दिए बिना आरोपी पक्ष के अपराध को स्थापित कर रही है। कहा कि ऐसे बर्खास्त कर्मचारियों के परिवारों को उनके आय स्त्रोतों के अवरुद्ध होने के कारण सामना करना पड़ेगा। कहा कि जिन कर्मचारियों को दरवाजा दिखाया गया है उनमें से ज्यादातर को पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने नियुक्त किया था। जब उन्होंने विभिन्न निजी स्कूलों पर पाबंदी लगा दी थी तो शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में समायोजित किया गया था। अब दशकों के बाद कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि और उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव की परवाह किए बिना दरवाजा दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मनमानी कार्रवाई ने कर्मचारियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है और सरकारी विभागों में कार्य संस्कृति को प्रभावित किया है। मांग की कि आरोपी कर्मचारियों को कानूनी रूप से आरोपों के खिलाफ अदालतों का दरवाजा खटखटाने दिया जाए।