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अंग दान नहीं कर सकते जम्मू के लोग

Thu, 15 Jan 2015 04:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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संभाग की लाखों की आबादी को मानव अंग प्रत्यारोपण की सुविधा नसीब नहीं हो पाई है। अस्पतालों में चाहकर भी लोग अंग प्रत्यारोपण नहीं करवा सकते हैं। अंग प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को मजबूरन दूसरे राज्यों का रुख करके लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अंग प्रत्यारोपण के लिए जीएमसी में कछुआ चाल की तरह काम हुआ है।
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संभाग में हर साल किडनी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या में क्रोनिक किडनी फेलियर के पीड़ित पहुंच रहे हैं। लेकिन सरकारी स्तर पर किडनी प्रत्यारोपण की अभी तक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड साइंस (स्किम) में किडनी प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक राहत दी जा रही है।

मगर जम्मू संभाग को इस आधुनिक सुविधा से अभी पीछे रखा गया है। सरकारी स्तर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन सुपर स्पेशलिटी में ही डायलेसिस सुविधा उपलब्ध है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के किसी अस्पताल में ऐसी सुविधा नहीं है। सुपर स्पेशलिटी में हर माह चार सौ से अधिक किडनी मरीजों के डायलेसिस किए जा रहे हैं। हर साल दो हजार से ज्यादा किडनी के मरीज पहुंच रहे हैं।
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इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलेसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है। लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। सुपर स्पेशलिटी के नेफरोलाजी विभाग के एचओडी डा. एसके बाली के अनुसार उच्चतम न्यायालय के आदेश पर किडनी प्रत्यारोपण सुविधा के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

इसी तरह  जीएमसी में राष्ट्रीय स्तर पर 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्तर के एक अभियान में कार्नियल (नेत्र) ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की गई थी। इसमें कई लोगों के कार्नियल ट्रांसप्लांट किए गए। इनमें अधिकांश बिना शिनाख्त के मिले शवों से ही मानव अंगों का ट्रांसप्लांट किया गया। देश में मानव अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए 1994 में संशोधित करके ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांटेशन एक्ट लाया गया, जिसे जम्मू-कश्मीर में 1997 में लागू किया गया।

लेकिन मजबूत ढांचागत सुविधाएं न होने से इस एक्ट का लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है। जीएमसी में आई बैंक के लिए भवन को तैयार किया जा रहा है। लेकिन सारी प्रक्रिया के मुक्कमल होने पर अभी सालों लग सकते हैं।
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