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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: जेई सिविल और सब इंस्पेक्टर भर्ती फिर रद्द करने के आदेश, एसएसबी की जांच करेगी समिति

Fri, 09 Dec 2022 03:01 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

कोर्ट ने कहा, एसएसबी ने एपटेक नाम की कंपनी से परीक्षाएं कराई हैं, जो एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट के न्यायाधीश वसीम सदीक नरगल ने वीरवार को इस मामले से जुड़ी याचिका के दौरान यह आदेश दिए। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस सब इंस्पेक्टर की कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा को भी स्थगित कर दिया है। 
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jammu kashmir high court kashmir - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सेवा चयन बोर्ड द्वारा कराई गई जेई सिविल और सब इंस्पेक्टरों की भर्ती को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। भर्ती रद्द करने के आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने एक रिटायर जज की अध्यक्षता में समिति गठित कर एसएसबी द्वारा कराई गई परीक्षाओं की जांच के निर्देश दिए हैं।

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कोर्ट ने कहा, एसएसबी ने एपटेक नाम की कंपनी से परीक्षाएं कराई हैं, जो एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट के न्यायाधीश वसीम सदीक नरगल ने वीरवार को इस मामले से जुड़ी याचिका के दौरान यह आदेश दिए।

उन्होंने कहा, भर्ती में टेंडर के नियमों/शर्तों को बदलने में अनियमितताएं हुई हैं। परीक्षा कराने वाली एजेंसी के खिलाफ धांधली की जांच चल रही है। लिहाजा इस समय तक जो भी परीक्षाएं उक्त टेंडर और अनुबंध के तहत की गई हैं, उनको रद्द किया जाता है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज ने कह, एसएसबी ने अपना पक्ष रखा है कि एपटेक कंपनी समेत पांच कंपनियों ने भर्ती के लिए टेंडर भरा था। इन पांच कंपनियों में एजुकेटी कॅरिअर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, अवा सिस्टम, सिगनेस इंफारमेशन सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और एपटेक लिमिटेड शामिल हैं।

इनमें से एपटेक और एजुकेटी ने पूरे दास्तावेज जमा कराए। इसके आधार पर दोनों को चुना गया। इसके बाद दोनों में से एपटेक ने सबसे अधिक बोली लगाई और इसके आधार पर इसे टेंडर जारी कर दिया। एसएसबी के इस पक्ष पर जज ने कहा, एक ब्लैकलिस्ट एजेंसी को टेंडर दिया गया।

इसमें वित्तीय हित को तरजीह दी गई और सार्वजनिक हित को नजरअंदाज कर दिया, जो कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। उक्त प्रक्रिया में पक्षपात की संभावना है। सेवा चयन बोर्ड की कार्यप्रणाली सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने में विश्वास को प्रेरित नहीं करती।

इसलिए बोर्ड के कामकाज की समीक्षा करना सभी हितधारकों के लिए अनिवार्य हो गया है। लिहाजा इस मामले में उच्च स्तरीय जांच हो। सरकार एक जांच समिति गठित करे। जिसका अध्यक्ष रिटायर जज से कम पद का न हो।

वित्तीय हित पर सार्वजनिक हित को देनी होगी तरजीह

न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल का मानना है कि केवल भर्ती एजेंसी द्वारा अधिक वित्तीय बोली लगाना ही टेंडर एवं अनुबंध देने का एकमात्र मापदंड नहीं हो सकता। जब तकनीकी मूल्यांकन में उक्त एजेंसी के पूरे अंक नहीं थे, उसे सिर्फ वित्तीय अंक के आधार पर टेंडर देना उचित नहीं। जनहित को तरजीह देनी होगी क्योंकि वर्तमान मामले में भर्ती में शामिल होने वालों के भविष्य का सवाल है। एक एजेंसी जो पहले ही दागी है, उससे परीक्षा नहीं कराई जा सकती।

9 महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई

जेई सिविल, सब इंस्पेक्टर, वित्त लेखा सहायक की भर्तियां पहले से रद्द हो चुकी हैं। मार्च में हुई परीक्षाआें को रद्द कर दिया गया था। सीबीआई इस मामले में घोटाले का पर्दाफाश कर चुकी है। एसएसबी को जिम्मा दिया गया कि भर्तियाें को निष्पक्ष तरीके से दोबारा कराया जाए। ओएमआर प्रक्रिया की जगह कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा हुई, लेकिन ब्लैक लिस्टेड कंपनी से भर्ती कराने पर भर्ती दोबारा रद्द हो गई।

आज होने वाली पीएसआई परीक्षा स्थगित

जम्मू-कश्मीर पुलिस सब इंस्पेक्टर की कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा सात दिसंबर से शुरू हुई है। शुक्रवार नौ दिसंबर को प्रस्तावित परीक्षा को जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) ने स्थगित कर दिया है। जेकेएसएसबी के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नौ दिसंबर को प्रस्तावित परीक्षा स्थगित की गई है।

इसके लिए अगली तारीख तय की जाएगी। गौरतलब है कि पीएसआई परीक्षा का शेड्यूल सात से 19 दिसंबर तक तय किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश को देखते हुए जेकेएसएसबी ने फिलहाल नौ दिसंबर की परीक्षा को ही स्थगित करने की अधिसूचना जारी की है। ब्यूरो

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