सात दिन चले विधानसभा के हंगामी सत्र के लिए यों तो 87 सदस्यों ने 570 प्रश्न दिए थे, लेकिन इनमे से 524 को ही प्रस्तुत करने की अनुमति मिली। इनमें से भी महज 47 प्रश्नों को ही सदन के पटल पर रखा जा सका।
सात दिनों में सदन में साढ़े 22 घंटे चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार सदस्यों की ओर से 297 स्टार्ड तथा 273 अनस्टार्ड प्रश्न दिए गए थे। इनमें से 46 को प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी गई।
कुल 524 प्रश्नों को स्वीकार किया गया। सदन में 47 प्रश्न आए और 99 पूरक प्रश्नों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही शून्य काल में 148 मुद्दों को उठाया गया।
दो सरकारी बिल प्रस्तुत किए गए और दोनों ही पारित किए गए। प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में 14 विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए थे, लेकिन इनमें से महज एक ही बिल सदन के पटल पर आ सका।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत 130 नोटिस प्राप्त हुए। इसमें से दो को अनुमति नहीं मिली और 44 पर ही चर्चा हो सकी। सदस्यों की ओर से प्राप्त कुल 52 प्रस्तावों में से दो ही सदन में आ सके।