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राहत या मजाक, 11 परिवारों के लिए एक कंबल

Mon, 22 Sep 2014 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, राजोरी
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बाढ़ पीडि़तों को हर संभव सहायता प्रदान करने और राहत सामग्री वितरित करने का दावा चाहे जिला प्रशासन और राज्य सरकार हर रोज करती है, लेकिन अभी भी जमीनी सतह पर कई जगहों पर यह दावे बिलकुल खोखले साबित हो रहे हैं।
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जिले की कोटरंका तहसील के लड़कोती गांव में बाढ़ और बारिश के रूप में प्रकृति के प्रकोप के बाद अब स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन के प्रकोप की मार झेल रहे हैं। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में बाढ़ का कहर करीब 33 परिवारों पर गिरा था। लेकिन, प्रशासन द्वारा कई हफ्ते बाद उन तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।

वह भी केवल 11 परिवारों को एक एक कंबल और एक तिरपाल ही मिला। बाकी के 22 परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे राम भरोसा अपना समय काट रहे हैं। बाढ़ पीडि़त मोहम्मद शरीफ पुत्र मोहम्मदा ने अपनी आप बीती सुनाते हुए कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से अपनी चार जवान बेटियों, एक बेटे और पत्नी के साथ स्थानीय जंगल में पेड़ के नीचे तिरपाल लगा कर रह रहे हैं।
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वह तिरपाल भी उन्होंने अपने ही पैसों से खरीदी है। राहत के नाम पर उन्हें किसी ने एक किलो चावल तक नहीं दिए हैं। गुलाम हुसैन ने बताया कि क्षेत्र के ज्यादातर लोग या तो मजदूरी करके या फिर दूध बेच कर अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं। यही कारण है कि किसी नेता या प्रशासनिक अधिकारी को उनकी याद नहीं आई।

अनवर हुसैन शाह ने जिला प्रशासन पर पक्षपात और भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों के पास सिर छुपाने के लिए भी कुछ नहीं है। स्थानीय निवासी नजीर हुसैन ने बताया कि वे अपनी मां, पत्नी और तीन बच्चों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट कर मदद की मांग की थी। अभी भी परिवार एक तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर है।
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