जम्मू। लगभग 16 महीने पुराने गुपकार गठबंधन का कुनबा बिखरने से कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 और राज्य के पुराने दर्जे की बहाली को तगड़ा झटका लगा है। गठबंधन से अलग हुए पीपुल्स कांफ्रेंस के आरोपों से इन दलों में विश्वास का संकट भी पैदा हुआ है। गठबंधन में शामिल दलों को केंद्र से लड़ने के बजाय अब अवाम में अपने चेहरे को पाक-साफ बताने की गंभीर चुनौती है। हालांकि, पीपुल्स कांफ्रेंस ने अलग होने के लिए जिम्मेदार किसी दल का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उसके निशाने पर नेशनल कांफ्रेंस है। बताते हैं कि पीपुल्स कांफ्रेंस को टूटने से बचाने के लिए गठबंधन से अलग होने का फैसला करना पड़ा। क्योंकि पार्टी के कई कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री गठबंधन से किनारा कर अन्य दल में शामिल होने का विकल्प तलाश रहे थे। दो से तीन पूर्व विधायकों के जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के संपर्क में रहने की भी बात सामने आई है।
गठबंधन में शामिल दलों की ओर से पिछली तीन बैठकों में राज्य के पुराने दर्जे की बहाली के लिए संघर्ष करने की सभी दलों ने प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन डीडीसी चुनाव होते ही सीटों के बंटवारे, भितरघात तथा प्रदर्शन को लेकर इनमें बिखराव की नौबत उठ खड़ी हुई। विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के लिए संघर्ष ही मुख्य वजह बनी। उत्तरी कश्मीर में पीपुल्स कांफ्रेंस का अच्छा खासा प्रभाव है। यहां नेकां भी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में दोनों दलों के बीच उठापटक होनी स्वाभाविक थी। उत्तरी कश्मीर के तीन जिलों की 42 सीटों में से मात्र 10 सीटें ही पीपुल्स कांफ्रेंस को दी गईं। सीट बंटवारे के बाद भी कई सीटों पर प्रॉक्सी उम्मीदवार उतारे जाने पर पीपुल्स कांफ्रेंस ने आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी के महासचिव एवं पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी ने नेकां सांसद पर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ तथा प्रॉक्सी उम्मीदवार के पक्ष में बैठकें करने का आरोप लगाया था। यही गठबंधन से अलग होने की वजह भी बनी।
फारूक के श्रीनगर पहुंचने के बाद होगी बैठक
सूत्रों ने बताया कि पीपुल्स कांफ्रेंस के गठबंधन से अलग होने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों पर विचार करने के लिए गुपकार गठबंधन की जल्द ही श्रीनगर में बैठका होगी। गठबंधन अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला इन दिनों जम्मू में है। वे बुधवार को श्रीनगर लौटेंगे। इसके बाद गठबंधन की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। साथ ही एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश होगी।