उन्होंने बताया कि भारत के अन्य क्षेत्रों में बसे पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को पलायन के बाद सभी हक और स्वतंत्रता मिली, जिसके बाद उन्होंने जल्द ही नई जिंदगी की शुरुआत कर ली, लेकिन हम यहां साजिश का शिकार बने और अनुच्छेद 370 व 35-ए के चलते हमें यहां नागरिकता भी नहीं मिल पा रही थी। लब्बा राम गांधी ने बताया कि हमें तकलीफ होती है जब हमें कोई पाकिस्तानी रिफ्यूजी कहता है।
पाकिस्तान रिफ्यूजियों को मूल अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्हें राज्य के नागरिक अधिकार नहीं दिए गए, विधानसभा चुनाव में वोट करने का अधिकार, संपत्ति खरीदने का अधिकार, प्रोफेशन कॉलेजों में पढ़ने का अधिकार और राज्य में सरकारी नौकरी पाने का अधिकार नहीं मिला। उन्होंने बताया कि पलायन के बाद रिफ्यूजियों को भारतीय नागरिकता मिलने के साथ लोकसभा चुनाव में वोट करने का अधिकार तो मिला, लेकिन राज्य के नागरिक अधिकार न मिलने के कारण हमें हर मोड़ पर जद्दोजहद करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार हमें नहीं मिला और हमारे पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार रहे, जिसको भाजपा ने पांच अगस्त को 370 खत्म करने के ऐतिहासिक फैसले के साथ खत्म किया। उनका कहना था कि हमारे आने के 10 साल बाद 1957 में संविधान बनाया गया था। हमारे आने के तीन साल बाद 1950 में अनुच्छेद 370 में बनाया गया। आर्टिकल 35 ए संविधान बनने के चार साल बाद 1953 में बनाया गया, जिसने भी यह बनाया उसने किसी सोची समझी साजिश के तहत हमें नजरअंदाज किया। इसको भाजपा सरकार ने खत्म किया। ये हमारे लिए त्योहार के जैसा है।
करपालपुर पंचायत के डिप्टी सरपंच बंसी लाल ने बताया कि स्थानीय लोग इस फैसले से बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि मंडल ब्लाक के गांवों में रह रहे रिफ्यूजियों ने नागरिक अधिकार न होने के कारण बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। मंडल ब्लाक की 10 पंचायतों के अंदर 60 गांवों में 20000 से ज्यादा पाकिस्तानी रिफ्यूजी रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 के कारण उन्हें सरकारी नौकरी व सेना में भर्ती होने के लिए बहुत मुसीबतें झेलनी पड़ीं।