पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू कश्मीर के संदर्भ में घर वापसी के मायने बदलने की जरूरत है। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में उमर ने कहा कि आतंकवाद के दौरान पीओके गए लोगों ने बंदूक छोड़कर घर वापसी की इच्छा जताई तो उनकी वापसी के लिए नीति बनाई गई थी लेकिन राज्यपाल का अभिभाषण इस पर मौन है।
राज्यपाल के अभिभाषण में वेस्ट पाकिस्तान की बात हुई लेकिन इस पर चुप्पी रही। यूनिफाइड कमांड की बैठक में भी यह मुद्दा नहीं आया। पीओके में फंसे ऐसे लोगों की घर वापसी के लिए कदम उठाए जाने चाहिएं। पिछली सरकार के दौरान 350 से अधिक ऐसे लोग पीओके से वापस आए लेकिन एनडीए शासनकाल में एक भी वापसी नहीं हुई है।
संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के लिए रियासत का झंडा लगाने की अनिवार्यता का आदेश जारी कर वापस लेने पर चुटकी लेते हुए उमर ने कहा कि क्या इसके लिए नागपुर से फोन आया था? उन्होंने कहा कि आरएसएस के दबाव में मुफ्ती सरकार ने यूटर्न लिया। आदेश निकालना कोर्ट में जवाब देने के लिए जरूरी था, लेकिन इसे वापस क्यों लिया गया। सरकार के पास क्या मजबूरी थी? जरूरी कोई फोन आया।
वह फोन नागपुर, दिल्ली या झंडेवाला से आया? उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने आदेश जारी होने को आंतरिक साजिश करार दिया। फिर इसकी जांच की बात कही गई जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। उमर ने कहा कि वह सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी रहे हैं और जानते हैं कि ऐसे आदेश ऊपर के निर्देश से ही जारी होते हैं। इस पूरे प्रकरण की जानकारी आरटीआई से ली जा सकती है।
कितने राजनीतिक बंदी हैं जेलों के अंदर?
उमर ने सवाल किया कि जम्मू कश्मीर में पीएसए के तहत जेलों में कितने लोग बंद हैं। जब महबूबा मुफ्ती विपक्ष की नेता थीं और मैं मुख्यमंत्री था, तब महबूबा कहती थीं कि हजारों लोग बंद हैं। अब वह कह रही हैं कि 16 लोग जेल में हैं। हजार की संख्या 16 पर कैसे पहुंच गई? पहले दस हजार लोगों के बंद होने के बारे में कहा जा रहा था। अब आंकड़े बदल क्यों गए हैं?
जावेद का हश्र वही न हो जो बेग का हुआ
उमर ने कहा कि पीडीपी के जावेद हुसैन बेग जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रख रहे थे तब उनका अंदाज अपने भाई मुजफ्फर हुसैन बेग की तरह था। तकरीर की शैली भी वही थी। लेकिन ध्यान रखिए कहीं आपका भी हाल भी वही न हो जाए जो बेग साहब का हुआ। गौरतलब है कि पार्टी में कम अहमियत के कारण सांसद बेग इन दिनों पीडीपी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।
कैबिनेट में संतुलन नहीं
उमर ने कहा कि कैबिनेट में संतुलन नहीं है। कारगिल और लद्दाख से कोई कैबिनेट मंत्री नहीं है। कोई महिला भी कैबिनेट मंत्री नहीं है। इस असंतुलन के बावजूद राज्यपाल के अभिभाषण में कैबिनेट में सभी लोगों के प्रतिनिधित्व की बात कही गई है।
कोल ब्लाक पिछली सरकार की उपलब्धि
उमर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोल ब्लाक का आवंटन पिछली सरकार के शासनकाल में हुआ है। अब नई सरकार इसका श्रेय ले रही है। राज्यपाल के अभिभाषण में कहा गया है रियासत में हालात सुधरे हैं। इसके जिक्र से हमें लगा कि हमने छह साल बरबाद नहीं किए। सुरक्षा हालात में सुधार पिछली सरकार की उपलब्धि है। कुछ और करना था जो किया होता तो हम विपक्ष में नहीं होते।
गठबंधन जनता के साथ धोखा
उमर ने कहा कि चुनाव के दौरान पीडीपी कहती रही कि उसकी लड़ाई भाजपा के साथ है और वह चुनाव बाद भाजपा से कोई समझौता नहीं करेगी, लेकिन चुनाव बाद गठबंधन कर लिया।
यह जनता के साथ धोखा है। क्या भाजपा अब सांप्रदायिक नहीं है। क्या बाबरी मस्जिद, गुजरात कांड और मस्जिद को इमारत बताकर गिराने के सुब्रह्मण्यम स्वामी के बयान के साथ भी पीडीपी है? रामजादे और अन्य पर क्या स्टैंड बदल गया है।
मतदान के लिए अलगाववादियों को श्रेय सोची-समझी साजिश
उमर ने कहा कि मुफ्ती ने भारी मतदान के लिए अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान को श्रेय देने वाला बयान जानबूझकर दिया, ताकि इस विवाद में लोग उलझ जाएं। इससे भाजपा के साथ गठबंधन और सीएमपी पर सवाल से ध्यान बंटाने की कोशिश की गई।
आपका फायदा हुआ रियासत का नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गठबंधन से पीडीपी का फायदा हुआ रियासत का नहीं। मुफ्ती को छह साल के लिए सीएम का पद मिल गया और पीडीपी को कैबिनेट में बड़ा हिस्सा। रियासत को कुछ नहीं मिला।
बाढ़ पीड़ितों के लिए कुछ नहीं
उमर ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए केंद्रीय बजट में कुछ नहीं दिया गया। डिलीमिटेशन पर 2026 से पहले कुछ नहीं करने का कानून है। ऐसे में डिलीमिटेशन का जिक्र जनता को धोखा देने जैसा है। वेस्ट पाकिस्तानियों का आप क्या देंगे? वह स्टेट सब्जेक्ट नहीं हैं।
फिर सरकारी नौकरी कैसे देंगे? सेना से जमीन वापसी का क्रम पिछली सरकार ने शुरू किया था। अब उसे प्रचारित किया जा रहा है। अगर कर सकें तो गुलमर्ग को सेना से खाली कराएं।