ईद के मौके पर राज्य सरकार की झोली खाली हो गई है। एक सप्ताह के भीतर ही सरकार के खजाने में एक हजार करोड़ से ज्यादा की रकम का भुगतान किया गया है।
1165 करोड़ के बकाया बिलों का भुगतान केवल एक सप्ताह के अंतराल में किया गया है। हालांकि अब भी राज्य की ट्रेजरियों में करोड़ों रुपये के बिल भुगतान के लिए लंबित हैं।
एक दिन में गए 765 करोड़
एकाउंट एंड ट्रेजरी निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि गत 24 जुलाई को 400 करोड़ और सोमवार को 765 करोड़ रुपये जारी कर ट्रेजरियों में बकाया लंबित बिलों का भुगतान किया गया है।
इसमें राज्य कर्मचारियों का वेतन, ठेकेदारों के बिलों का भुगतान, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजे के बिल और मनरेगा आदि का भुगतान शामिल है। इसमें ही एसएसएस और आरईटी शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये का फंड भी शामिल था।
2014-15 का प्लान मंजूर नहीं
वित्त राज्यमंत्री डॉ. मनोहर लाल शर्मा का कहना है कि राज्य में मौजूदा वित्त संकट की वजह 2014-15 के वार्षिक प्लान को केंद्र सरकार द्वारा अब तक मंजूर नहीं किया जाना है।
राज्य सरकार ने अपने स्रोतों के जरिये ईद के मद्देनजर कर्मचारियों के वेतन और लंबित बिलों का भुगतान किया।
उनका कहना है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के लिए मंजूर राशि को जारी किए जाने और वार्षिक प्लान को मंजूर किए जाने के बाद वित्तीय संकट खत्म हो जाएगा।
रकम ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर
वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर पहले ही केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली से यह मसला उठा चुके हैं।
खास बात यह है कि 1165 करोड़ रुपये के भुगतान के बावजूद राज्य का ट्रेडर, उद्यमी, व्यापारिक और कांट्रेक्टर वर्ग संतुष्ट नहीं है।
इस तबके के नुमाइंदों का कहना है कि यह भुगतान की राशि ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है।