रियासत में नई सरकार के गठन में उमर अब्दुल्ला किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। हालिया घटनाक्रम से राज्यपाल शासन की प्रबल संभावना के मद्देनजर यह कयासबाजी तेज हो गई है कि नई सरकार दिल्ली चुनाव के बाद नेशनल कांफ्रेंस के सहयोग से भाजपा बनाएगी। बाकी का संख्याबल निर्दलीय विधायक पूरा करेंगे।
विधानसभा चुनाव में पीडीपी को 28, भाजपा को 25, नेकां को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं। शेष सात सीटों में दो पीपुल्स कांफ्रेंस, एक सीपीआई एम, एक पीडीएफ तथा तीन निर्दलीय के पास हैं। सज्जाद लोन की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का भाजपा को समर्थन माना जाता है।
सूत्रों का कहना है कि परिणाम के ठीक बाद उमर की दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हुई थी। इसमें सरकार गठन के तमाम मुद्दों पर प्रारंभिक चर्चा के दौरान यह बात सामने आई थी कि नेकां का उप मुख्यमंत्री होगा।
मंत्रिमंडल में नेकां कोटे के मंत्री होंगे और दिल्ली की सरकार में भी नुमाइंदगी होगी। इस बीच उमर अपने अस्वस्थ पिता का हालचाल लेने लंदन चले गए थे।
लगभग 12 दिनों बाद वे स्वदेश लौटे तो उन्होंने राज्यपाल एनएन वोहरा से दिल्ली में मिलकर कार्यकारी मुख्यमंत्री पद के दायित्व से मुक्त करने का आग्रह कर सियासी बवंडर मचा दिया।