जम्मू-कश्मीर को आज 10 साल बाद नया मुख्यमंत्री मिलेगा। 10 साल बाद यह मौका आया है, लेकिन श्रीनगर में उत्साह और उल्लास की जगह अजीब सी खामोशी है।
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आम दिनों में लाल चौक और शहर के अन्य हिस्से जहां देर रात तक गुलजार रहते थे, वह मंगलवार का माहौल रात आठ बजे से ही सुनसान नजर आने लगे हैं। दुकानें बंद हो गई हैं। इक्का-दुक्का वाहन आते जाते दिखाई देते हैं।
हालांकि शपथ समारोह स्थल शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) के बाहर रौनक है। अंदर मंच सज चुका है। कुर्सियां नेताओं का इंतजार कर रही हैं। रौनक एयरपोर्ट पर भी है, जहां समारोह में हिस्सा लेने वाले नेताओं का आना शुरू हो गया है।
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वर्षों तक संवेदनशील रहा लाल चौक क्षेत्र त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में है। दिनभर श्रीनगर में नेताओं की गाड़ियां बारी-बारी से आती रहीं। उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव सहित कई नेता समारोह का हिस्सा बनने के लिए पहुंच गए हैं।
कुछ नेता अभी आने बाकी हैं। स्थानीय लोग अंदर से नई सरकार के गठन को लेकर खुश हैं लेकिन बाहरी लोगों को कुछ भी बताने से डर रहे हैं, झिझक रहे हैं।
मनोनीत मुख्यमंत्री के आवास गुपकार रोड की तरफ बढ़े तो वहां भी शांति है।
न तो आवास पर कोई लाइटिंग नजर आई और न ही पार्टी के मुख्य कार्यालय में किसी तरह की सजवाट। लोगों के बीच शपथ ग्रहण की चर्चा जरूर थी, लेकिन जश्न जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। केवल सुरक्षाबलों का पहरा यह जरूर इशारा करते हैं कि यहां कोई बड़ा कार्यक्रम है। देर रात तक गुलजार रहने वाले श्रीनगर के अधिकांश क्षेत्रों में सन्नाटा है।
गुपकार रोड पर भी जश्न जैसा कुछ नहीं, इक्का-दुक्का वाहन ही दिखे
श्रीनगर के बाजार में रात आठ बजे शटर गिरना शुरू हो गए हैं। मनोनीत सीएम के आवास वाले गुपकार रोड पर भी रौनक नहीं है। यहां दिखे तो सड़क से निकलते इक्का-दुक्का वाहन। उनमें भी ज्यादातर सुरक्षा कर्मियों के हैं।
उमर अब्दुल्ला के घर के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ नहीं है। न ही किसी तरह की कोई गतिविधि। नागरिक सचिवालय जरूर मनोनीत सीएम के स्वागत के लिए तैयार दिखाई दे रहा है। इसकी चमक पहले से बढ़ी है। शपथ ग्रहण समारोह स्थल के पास भी जाने की मनाही है।
जैसे ही कार्यक्रम स्थल की तरफ बढ़ते हैं तो सुरक्षाबल दूर से ही रुकने का इशारा कर देते हैं। आयोजन स्थल की तरफ किसी को भी बिना जांच के नहीं जाने दिया जा रहा है। बिना पहचान पत्र के तो बिल्कुल भी नहीं। डल झील में पर्यटकों से ज्यादा जम्मू-कश्मीर की रिवर पुलिस की कश्तियां हैं। ये पूरे डल क्षेत्र में गश्त कर रही हैं।