एक साक्षात्कार में उमर से समय सीमा के बारे में और पूछा गया तो उन्होंने कहा, यह मेरे और मेरे ऊपर वाले के बीच की बात है। जब मुझे जनता को बताना होगा, वे जान जाएंगे। मैं आपको ऐसी स्थिति में नहीं डालूंगा जहां आप मेरे पीछे स्टॉपवॉच लेकर खड़े हों। एक सीमित समय सीमा है। अगर यह मेरे गद्दी छोड़ने तक राज्य का दर्जा नहीं मिला तो यह केंद्र सरकार की विफलता होगी।
सीएम ने इससे पहले 24 जून को भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने तब कहा था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने पर अगर विधानसभा भंग करनी पड़े तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मुख्यमंत्री के इस बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा के चुनाव में तीसरी अधिसूचना के तहत हुए चुनाव में तीन वोट खारिज हो गए। वहीं 28 की संख्याबल वाली भाजपा 32 वोट पाकर अपना प्रत्याशी जिताने में सफल रही। चार अतिरिक्त मतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।