डेंगू और फिर स्वाइन फ्लू जैसे वायरल रोग चुनौती बनते जा रहे हैं। पिछले कुछ साल से वाटर वार्न और एयर वार्न वायरल का हमला तेज हुआ है, लेकिन ऐसी महामारी वाली बीमारियों से कोई सीख न लेते हुए भविष्य के लिए कोई स्थायी पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।
मौजूदा हालात में स्वाइन फ्लू के आगे स्वास्थ्य महकमे की तैयारी ढीली दिखी है। आइसोलेशन बेड या वार्ड भी सिर्फ औपचारिकता तक रहे हैं। दवाओं का भी टोटा जारी है।
वर्ष 2013 में डेंगू ने राज्य के कई जिलों पर कहर बरपाया था। उस समय कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर के अलावा अन्य क्षेत्रों में करीब दो हजार आधिकारिक तौर पर लोग डेंगू से पाजिटिव हुए थे।
इनमें अनाधिकारिक तौर पर बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए दूसरे राज्यों में गए और कई लोगों की मौत हुई। हालांकि पिछले साल डेंगू ने ज्यादा डराया नहीं। नए साल के आगमन के साथ ही स्वाइन फ्लू ने विभाग के पसीने छुड़ा दिए हैं।
स्वाइन फ्लू के लिए ही संभाग के दस जिलों पर सिर्फ जीएमसी के चोपड़ा नर्सिंग होम में उपयुक्त सर्विलांस सेंटर स्थापित है। जिला स्तर पर पर्याप्त आइसोलेट यूनिट की कोई व्यवस्था नहीं है।