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रेल बजट: जम्मू-कश्मीर को मिला, 'बाबा जी का ठुल्लू'

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मोदी सरकार के पहले रेल बजट से रियासत को बहुत सारी उम्मीदें थीं लेकिन सरकार का यह रेल बजट रियासत के लिए निराशाजनक रहा। बजट में नई ट्रेन और सुविधांए देना तो दूर की बात है, रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पुराने वादों को पूरा करने का आश्वासन तक नहीं दिया गया।
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जम्मू पुंछ रेल मार्ग का सर्वे कराने का वादा पिछले बजट में किया गया था लेकिन इस बार इस काम को गति देने के लिए कोई वादा नहीं किया गया।

बता दें कि इस रूट को शुरू करने की मांग कई दशकों से हो रही है लेकिन इस बार भी इस रूट के यात्रियों को निराशा ही हाथ लगी। वहीं, कटड़ा स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस करने के बारे में भी बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है।

जम्मू-बनिहाल टनल का जिक्र तो बजट भाष्ण में किया गया लेकिन इस बारे में सिर्फ यह कहा गया कि, इस इलाके में रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा परंतु विस्तार कैसे होगा, कब होगा और किन इलाकों में कब तक काम पूरा किया जाएगा इन बातों पर कुछ नहीं कहा गया है।
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आदर्श स्टेशन की बात भी गोल

हालांकि रेल बजट में किराया नहीं बढ़ाया गया है लेकिन महंगाई के इस दौर में जनता को किराया कम होने की उम्मीद थी। रेल बजट का पहला भाष्‍ण सुनने के बाद लोगों को कोई खास खुशी नहीं हुई है। बजट में जम्मू-कश्मीर को कुछ भी नहीं दिया गया है।

जम्मू रेलवे स्टेशन को आदर्श स्टेशन बनाने की बात भी पहले कही जा चुकी है लेकिन इस बारे में भी बजट में कोई बात नहीं की गई है। रेल बजट से पहले जनता को मोदी सरकार के रेल बजट से बहुत उम्मीदें थीं। रियासत की अर्थव्यस्‍था पर्यटन पर टिकी है लेकिन रियासत को अन्य राज्यों से जोड़ने के लिए नई ट्रेनें भी शुरू नहीं की गई हैं।

वहीं कश्मीर में मौजूद रेल नेटवर्क को सुधारने के लिए भी बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है। बता दें कि बीते साल पीएम बनने के बाद रियासत आए पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि कल से कटड़ा के लिए छह ट्रेनें शुरू हो जाएंगी लेकिन पीएम मोदी का वह 'कल' अभी तक नहीं आया है।
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इस बार भी नहीं मिली कोच फैक्ट्री

जम्मू कश्मीर में रेलवे कोच फैक्ट्री की मांग को इस बार भी नजरअंदाज कर दिया गया है। बता दें कि बीते साल भी रियासत के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रियासत में रेलवे कोच फैक्ट्री बनाने की मांग की थी लेकिन बीते साल भी इस बारे में कोई घोषणा नहीं की गई थी।

व्यापारी संगठनों ने भी बजट को निराशाजनक और रियासत के संदर्भ में नकारात्मक बजट करार दिया है। संगठनों का कहना है कि, हमेशा की तरह इस बार भी रियासत को बजट से अछूता रखा गया है, रियासत के साथ दोहरा व्यवहार किया गया है, नई ट्रेनें न मिलने से और पूरानी ट्रेनें शुरू न होने से रियासत को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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