रियासत के विधानसभा चुनाव में घाटी में नोटा का बटन खूब दबा। नोटा का बटन दबाने में जम्मू के लोगों से कश्मीरी काफी आगे रहे। रियासत में कुल मतदान का एक फीसदी मत यानी 49,129 वोट नोटा के खाते में गए।
इनमें आधे से ज्यादा कश्मीर की 46 सीटों पर पड़े। लद्दाख क्षेत्र की चार सीटों पर 1200 से अधिक लोगों ने नोटा का बटन दबाया। यहां सबसे अधिक लेह सीट पर मतदाताओं ने प्रत्याशियों की नापसंदगी पर मुहर लगाई।
इस सीट पर गठबंधन सरकार के मंत्री नवांग रिगजिन जोरा तथा भाजपा के चेरिंग दोरजे के बीच सीधा मुकाबला था। घाटी में प्रत्याशियों की नापसंदगी पर 27,746 वोट पड़े।
बांडीपोरा में सबसे अधिक नोटा
बांडीपोरा में सबसे अधिक 1641 और बटमालू में सबसे कम मात्र 86 वोट नोटा के लिए पड़े। नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की बीरवाह सीट पर 710 एवं सोनवार में 305 मत पड़े तो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की सीट पर 308 मतदाताओं ने प्रत्याशियों की नापसंदगी पर मुहर लगाई।
अब्दुल्ला परिवार की परंपरागत सीट गांदरबल में 800 मतदाताओं ने नोटा के पक्ष में मतदान किया। उड़ी में पिछले दिनों जहां आतंकियों ने सेना के कैंप पर हमला किया था, वहां बंपर वोटिंग के बाद भी 729 मतदाता नोटा के पक्ष में रहे। यहां मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज ताज मोहिउद्दीन मैदान में थे।
जम्मू संभाग में 21,383 ने दबाया नोटा
आतंकवाद तथा अलगाववाद प्रभावित कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, सोपोर, बारामूला, शोपियां, गुलमर्ग में भी नोटा को काफी मतदाताओं ने पसंद किया।
उधर, जम्मू संभाग में 21,383 मतदाताओं ने उम्मीदवारों की नापसंदगी पर मुहर लगाई। बनिहाल में सबसे अधिक 2405 तो सबसे कम जम्मू पूर्व में 129 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।
डिप्टी चीफ मिनिस्टर की सीट छंब में 223 ने नोटा पर वोट दिया। रामनगर और चिनैनी में एक हजार से अधिक मतदाताओं ने प्रत्याशियों के प्रति नापसंदगी जताई।