बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा जीरो लाइन के तमाम गांवों में टूरिस्ट हट बनाने के प्रस्ताव को सीमा पर बने ताजा हालात से बड़ा झटका लगा है।
बॉर्डर फेस्टिवल से दहशत की खाई को पाटने का हाल में प्रयास किया गया था। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर फिर से दहशत पसर गई है।
ऐसे में लोग अपने लिए गांव में ही सुरक्षित स्थान पर पनाह दिए जाने की मांग उठाने लगे हैं। दरअसल हाल के महीनों में पाकिस्तान ने जो रणनीति बनाई है उसमें सीमा सुरक्षा बल की अग्रिम चौकियों के बजाए सीधा आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है।
पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान रेंज में आने वाले गांवों में न सिर्फ दहशत पसर जाती है, बल्कि ग्रामीणाें को जान के लाले पड़ जाते हैं। गांव में ऐसा कोई स्थान नहीं मिलता जहां पर गोलाबारी के दौरान भी ग्रामीणों को सुरक्षा मिल सके।
ऐसी परिस्थितियों के लिए सरकार ने जीरो लाइन पर स्थित सभी 22 गांवों में पक्के बंकर बनाने का प्रस्ताव भेजा था, जो अभी तक अधर में लटका हुआ है।
जीरो लाइन पर स्थित गांवों के लोगों का कहना है कि गोलाबारी के दौरान उन्हें सबसे पहले अपनी व मवेशियों की जान बचाने के इंतजामों की जरूरत है। इसके लिए सरकार ने पक्के बंकर बनाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आए दिन गोलाबारी होती है और ग्रामीणों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने सभी बाईस गांवों में पक्के बंकर बनाने के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था, जिसके लिए बाकायदा भूमि की शिनाख्त कर रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है।