फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीरी पंडितो के लिए अलग कालोनी नहीं

Sun, 29 May 2016 12:21 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर

सार

  • महबूबा ने सदन में की घोषणा, बोलीं-सब मिल जुलकर रहेंगे
  • जब माहौल सामान्य हो तो अपने गांवों में चले जाएं
  • सरकार उनकी ससम्मान वापसी के लिए प्रतिबद्ध
विज्ञापन
व‌िधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राज्य सरकार ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इनके लिए अलग कालोनी नहीं बनाई जाएगी बल्कि सबके साथ मिलकर ही रहेंगे।
विज्ञापन


इन कालोनियों में 50 फीसदी कश्मीरी पंडित रहेंगे और शेष अन्य लोग। कोई भी इस कालोनी में रह सकता है। यह घोषणा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को सदन में की।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि कश्मीरी पंडित यहां आएंगे तो मिल जुलकर रहेंगे।

हालात ठीक होने पर वे अपने गांवों में चले जाएंगे। अभी गांवों में हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। कहा कि वर्किंग ग्रुप की बैठक में भी यही फैसला हुआ था कि उनके लिए ट्रांजिट एकोमोडेशन दिया जाएगा।
विज्ञापन

'कश्मीरियत की भावना के साथ पंडित यहां आएंगे तो मिल जुलकर रहेंगे'

जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि नेकां-कांग्रेस के कार्यकर्ता भी गांवों से आकर शहरों में रह रहे हैं। उन्हें यहां सुरक्षा मुहैया कराई गई है। क्यों नहीं उनसे कहा जाता कि वे गांवों में चले जाएं। इसीलिए कि वहां रहना सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरियत की भावना के साथ पंडित यहां आएंगे तो मिल जुलकर रहेंगे। हालात ठीक हो जाएं तो अनंतनाग, बारामुला के अपने गांवों में चले जाएं। जब उन्हें एतबार हो जाए तो अपने गांवों में चले जाएं। उन्होंने कहा कि उनके आने से हमारा खजाना ही भरेगा।

​उन्होंने कहा कि जब पंडितों को बसाने की बात की जाती है तो इजराइल बनाने की बात कहकर हंगामा किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे तो गुजारिश करेंगी कि जो एम्स यहां बन रहा है उसमें कश्मीरी पंडितों सहित हमारे राज्य के जो लोग बाहर काम कर रहे हैं वे भी आएं।
विज्ञापन

सैनिक कालोनी स्टेट सब्जेक्ट का मामला: महबूबा

व‌िधानसभा की कार्रवाई के दौरान मौजूद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
राज्य सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि सैनिक कालोनी केवल स्टेट सब्जेक्ट वालों के लिए होगा। राज्य के विशेष दर्जे से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। यह घोषणा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सदन में की।

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान शनिवार को उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला को आड़े हाथों लिया। कहा कि ताज्जुब होता है कि उमर अब्दुल्ला खुद मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे यह कैसे सोच सकते हैं कि इसमें राज्य के बाहरी लोगों को बसाया जाएगा। वर्ष 1975 में शेख अब्दुल्ला ने सैनिक कालोनी का उद्घाटन किया था।

इसके बाद वर्ष 2011 में यह मुद्दा फिर आया जब उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे। उस समय इसके लिए जमीन चिह्नित करने की हिदायत दी गई थी। वर्ष 2012, 2013, 2014 में भी इसके लिए मीटिंग हुई।

राज्यपाल ने भी इस मुद्दे पर बैठक बुलाकर जमीन चिह्नित करने को कहा। हाल ही में राज्यपाल की ओर से बुलाई गई बैठक में अस्वस्थता की वजह से वे शामिल नहीं हो सकीं। इसमें जमीन चिह्नित करने कहा गया।

उन्होंने कहा कि फिलहाल सैनिक कालोनी के लिए जमीन चिह्नित नहीं हो पाई है। उमर की ओर इशारा करते हुए कहा कि नफरत फैलाने के लिए यह भ्रम फैलाने की कोशिश की गई कि सैनिक कालोनी में नान स्टेट सब्जेक्ट वालों को भी बसाया जाएगा। इस पर उमर ने आपत्ति जताई कि उनके बयान को गलत ढंग से रखा जा रहा है। उन्होंने सिर्फ इतना पूछा था कि सरकार की सैनिक कालोनी के संबंध में माडलिटी क्या होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें