पिछले साल दीवाली और अन्य त्योहारों पर खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पूरे शहर में जोरशोर से अभियान चलाया गया था और मिलावटी और खराब खाद्य सामग्री नष्ट की गई थी।
इस बार लगता है कि प्रशासन ने लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की कसम खाई है। नगर निगम का हेल्थ विंग और ड्रग एंड फूड कंट्रोल के बीच ठनी है।
इसके कारण न तो मिठाइयों की कोई जांच हो रही है और न ही सैंपल उठाए जा रहे हैं। विभागीय कार्रवाई में जब सैंपल उठाए जाते थे, तो दुकानदार मिठाइयों, मावा या अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने से डरते थे।
पिछले साल जीआरपी के माध्यम से रेलवे स्टेशन से कई क्विंटल मिलावटी मावा पकड़ा गया था, जिसे शहर में आने ही नहीं दिया गया।
हेल्थ विंग ने ही शहर के प्रमुख मिठाई की दुकानों में छापामारी करके मिलावटी खाद्य पदार्थ बाहर फेंके थे। साफ-सफाई और अन्य कई चीजों की जांच के साथ सैंपल भी उठाए गए थे।
परंतु इस बार डी-नोटिफाई का सहारा लेकर हेल्थ विंग खुद को सैंपल उठाने में असमर्थ बता रहा है। इससे दुकानदारों की मौज है। मुनाफे के लिए दुकानदार क्या मिलावट कर रहे हैं, क्या नहीं कुछ पता नहीं।
हेल्थ विंग के फूड सेफ्टी अफसर और ड्रग एंड फूड कंट्रोल विभाग का अमला पता नहीं, किस आदेश का इंतजार कर रहा है। नतीजतन लोगों की सेहत का कबाड़ा किया जा रहा है।
नगर निगम कमिश्नर मंदीप कौर के मुताबिक वह सैंपल नहीं उठा सकते हैं, उन्हें डी-नोटिफाई किया गया है। इसकी वजह से सैंपल उठाने का अधिकार उनके पास नहीं हैं।
ड्रग एंड फूड कंट्रोल विभाग में सहायक नियंत्रक संजीव गुप्ता ने खाद्य पदार्थों के सैंपल उठाने और जांच करने की जिम्मेदारी से सीधे ही पल्ला झाड़ दिया। उन्होंने इस बाबत उच्चाधिकारियों से बात करने की सलाह दे दी।