नवरात्र के शुरू होते ही कभी देविका नगरी रामलीला में ही रंगी हुई नजर आती थी। रात होने पर देविका नगरी की हर गली में बोल सिया पति रामचंद्र की जय की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकता का दौर आता गया। युवाओं और बच्चों का रुझान रामलीला से पीछे हटता चला गया।
देविका नगरी में जहां बीस से ज्यादा स्थानों पर ही रामलीला का मंचन होता था। वहीं आज चंद स्थानों पर ही रामलीला का मंचन हो पा रहा है। करीब बारह वर्ष पहले बच्चे और युवा नवरात्रों में रामलीला का शुरू होने का बेसब्री से इंतजार करते थे। उनको पता होता था कि नवरात्र के दौरान रामलीला का मंचन शुरू हो जाएगा।
रात होने पर सभी अपने परिवार सहित रामलीला देखने के लिए पहुंचते और रामलीला में भगवान श्री राम की महिमा का आनंद उठाते थे। लेकिन, जैसे-जैसे आधुनिकता का दौर बढ़ता गया, बच्चों और युवाओं का रुझान रामलीला से हटता गया।
अचानक केबल टीवी नेटवर्क में मनोरंजन चैनलों की संख्या बढ़ी और युवा व बच्चे रामलीला से पीछे हटते चले गए। फिर कंप्यूटर का भी विस्तार बढ़ा और बची हुई कसर मोबाइल फोन और इंटरनेट ने पूरी कर दी। कुछ वर्षों से बच्चे और युवा वर्ग कंप्यूटर व इंटरनेट की दुनिया में खोए हुए हैं।
उनके पास रामलीला देखने के लिए समय ही नहीं बचा है। युवाओं और बच्चों के रुझान नहीं होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से गैड़ा तालाब, फायर स्टेशन के नजदीक वार्ड नंबर तीन, सुभाष नगर, शिवनगर, शक्ति नगर, बाड़या में रामलीला का मंचन बंद हो चुका है।
स्थान की कमी भी खली
इन स्थानों पर रामलीला बंद होने का कुछ हद तक कारण स्थान का उपलब्ध नहीं होना भी है। जनसंख्या में वृद्धि के साथ उधमपुर के प्रत्येक मोहल्ले में मकानों की संख्या में सैकड़ों की वृद्धि हुई है। वर्तमान समय में हालात यह बन चुके हैं कि नए मकान बनाने के लिए शहर में जमीन ही नहीं बची है। ऐसे में रामलीला के लिए खुले मैदान का उपलब्ध होना काफी मुश्किल है। जमीन नहीं मिलने के कारण भी काफी रामकला केंद्रों ने मंचन बंद कर दिया है।
इस बार बिजली बनी बाधा
इस बार कई ग्रामीण इलाकों में बिजली के अभाव में रामलीला का मंचन नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों बारिशों के दौरान पूरे जिले में तीन सौ से ज्यादा ट्रांसफार्मर खराब हुए थे। ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं होने से अभी भी कई गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। इसी कारण रामलीला का मंचन नहीं हो पा रहा है।