कश्मीर में सैनिक कालोनी को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सैनिक कालोनी के नाम पर कहीं भी न तो जमीन आवंटित की गई है और न ही आवंटित करने की योजना है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा है कि कामकाजी वर्ग तथा अन्य प्रोफेशनल की ही तरह राज्य के पूर्व सैनिकों ने भी हाउसिंग कालोनी के लिए जमीन की मांग की है, लेकिन अब तक घाटी में कहीं भी इस प्रकार के प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है।
उन्होंने इस संबंध में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह पीडीपी-भाजपा के एजेंडा आफ एलायंस में भी अच्छी तरह से वर्णित है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब राज्य में पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों ने गति पकड़नी शुरू की है तो लगता है किसी उद्देश्य से प्रेरित होकर घाटी में शांति को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।
सितंबर 2014 की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब यहां की अर्थव्यवस्था पटरी पर आनी शुरू हुई है। दुर्भाग्य से कश्मीर में पर्यटन तथा व्यापारिक गतिविधियों का सीजन शुरू होते ही निहित स्वार्थों की वजह से राज्य में शांति को भंग करने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।
उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों तथा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों से ऐसे अवांछनीय तत्वों से सचेत रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देशभर में जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे की रक्षा तथा सुरक्षा के संबंध में देशभर में बने माहौल के दौरान ऐसे प्रयास को किसी प्रकार की जगह नहीं मिलेगी।